एक महीने की छुट्टियां बिताने के बाद उन्नाव जिले के लाल अजीत कुमार आजाद 10 फरवरी को जम्मू के लिए घर से रवाना हुए थे। गुरुवार दोपहर जम्मू से श्रीनगर जाते समय उन्होंने फोन पर पत्नी मीना से बात की थी। दो मिनट की बातचीत में उन्होंने श्रीनगर पहुंचकर दोबारा फोन करने का वादा किया था।
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उन्नाव का लाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला
देर शाम तक मीना अजीत के फोन का इंतजार करती रहीं लेकिन फोन नहीं आया। रात करीब दस बजे मीना के फोन की घंटी बजी तो उसने लपक कर फोन उठाया। दूसरी तरफ से अजीत के शहीद होने की सूचना दी गई तो पहले तो उसे विश्वास नहीं हुआ। वह बुत बनी बैठी रहीं फिर फूट-फूटकर रोने लगीं। बेटियों को बांहों में समेटे वह घंटों बिलखती रहीं।
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उन्नाव का लाल शहीद
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घरवालों ने बेटियों का हवाला देकर उन्हें किसी तरह संभाला। मीना ने बताया कि अजीत ने श्रीनगर पहुंचकर बात करने का वादा किया था लेकिन वह अपना वादा पूरा नहीं कर सके। मां की आंखों में आंसू देख उनकी दोनों बेटियां भी बिलख रही हैं।
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उन्नाव का लाल शहीद
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सीआरपीएफ में जवान अजीत कुमार की दो बेटियां हैं। जिनमें ईशा (8) व श्रेया (6) साल की है। अजीत कुमार ने दोनों बेटियाें को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था। पत्नी मीना ने बताया कि 10 फरवरी को जब वह जम्मू जा रहे थे तब उन्होंने बेटियों को मन लगाकर पढ़ने व डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने की बात कही थी।
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उन्नाव का लाल शहीद
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जवान बेटे के आतंकी घटना में शहीद होने की खबर ने मां राजवंती को अंदर तक झकझोर दिया।
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उन्नाव का लाल शहीद
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शुक्रवार सुबह जैसे ही जनप्रतिनिधियों के घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ तो राजवंती खुद को रोक नहीं सकी।
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उन्नाव का लाल शहीद
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राजवंती का कहना था कि उन्हें अब अपने बेटे की शहादत का बदला चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दे।
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डेमो पिक
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अजीत के शहीद होने की खबर मिलते ही भाइयाें का रो रोकर बुरा हाल है। हालांकि उन्होंने कहा कि उनका भाई देश के लिए शहीद हुआ है ऐसे में उन्हें गर्व है।
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अजीत पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। छोटा भाई सुजीत बहराइच के परिषदीय विद्यालय में शिक्षक है। जबकि रंजीत शहर में रहकर ही प्राइवेट नौकरी करता है।