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पुलवामा आतंकी हमला: दर्द भी है गुस्सा भी, बोले..अब आतंकियों का अंत हो, कीमत चाहे जो चुकानी पड़े

Sun, 17 Feb 2019 01:09 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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जम्मू कश्मीर के पुलवामा हमले में सीआरपीएफ जवान प्रदीप कुमार यादव की शहादत पर मोहल्ले वालों की आंखों में आंसू थे तो आतंकियों के खिलाफ गुस्सा भी चेहरे पर साफ दिख रहा था। बस एक ही मांग थी कि अब आतंकियों का अंत हो। कीमत चाहे जो चुकानी पड़े।
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मूलरूप से तिर्वा कन्नौज के सुखसेनपुर गांव निवासी प्रदीप का परिवार 10 साल से कल्याणपुर के बारासिरोही में रह रहा है। प्रदीप के मिलनसार व्यवहार के कारण वह सबके चहेते थे। 10 फरवरी को छुट्टी खत्म होने के बाद जाने से पहले प्रदीप आस-पड़ोस में रहने वाले हर शख्स से मिलने पहुंचे थे।
 
 
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मोहल्ले में रहने वाले रिटायर्ड सूबेदार प्रदीप यादव ने बताया कि मनमौजी स्वभाव के कारण मोहल्ले के बच्चे भी उसे खूब मानते थे। बड़ों के प्रति आदर-सम्मान कूट कूटकर भरा था। आने पर लोगों से मिलकर हालचाल लेना और फिर जाते वक्त बड़ों का आर्शीवाद लेना वह कभी नहीं भूलता था। मोहल्ले के संतोष गुप्ता प्रदीप को याद करके फफक कर रो पड़े। बोले, चार दिन पूर्व हुई मुलाकात आखिरी हो जाएगी, सोचा नहीं था। 
 

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गुरुवार रात प्रदीप के शहीद होने की खबर आते ही मोहल्ला गमगीन हो गया। परिवार और रिश्तेदारों के पहुंचने के साथ ही मोहल्ले वाले भी रात में ही घर पर एकत्र हो गए। सुबह परिवार के पैतृक गांव जाने के बाद भी भीड़ नहीं छटी। घर पर ताला लगा होने के बावजूद लोग घर के बाहर खड़े होकर प्रदीप और उसके परिवार के बारे में चर्चा करते रहे। 
 
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पुलवामा ट्रांसफर होने के बाद प्रदीप घर आया था। 30 जनवरी को वह ड्यूटी ज्वाइन करने गए थे। जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के चलते प्रदीप पुलवामा नहीं पहुंच सके थे। वह तीन दिन बाद वापस घर लौट आए थे। 10 फरवरी को यहां से पुलवामा गए थे। 

 
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पुलवामा में सीआरपीएफ के दल पर आतंकी हमले की खबर मिलने के बाद एसएसपी अनंत देव ने आदेश दिया कि अग्रिम आदेशों तक सभी सीओ व थानेदार नए तैनाती स्थल को रवाना नहीं होंगे। इसके चलते ट्रांसफर के बाद भी सीओ और इंस्पेक्टर व सबइंस्पेक्टर पुराने तैनाती स्थल पर तैनात रहे।  

 
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शुक्रवार सुबह कल्याणपुर सीओ राजेश पांडेय और थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह प्रदीप के घर पहुंचे, लेकिन वहां ताला लगा मिला। मोहल्ले वालों से शहीद के परिवार के बारे में जानकारी की। पैतृक गांव जाने का पता चलने पर संवेदना प्रकट करके लौट गए।

 
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मोहल्ले में रहने वाली कौशल्या के मुताबिक रात में प्रदीप के शहीद होने का पता चलते ही मोहल्ले की सभी महिलाएं उसके घर पर पहुंच गई थीं। सभी प्रदीप की पत्नी नीरज को ढाढ़ंस बंधाने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन उस वक्त हर किसी की आंखें छलक पड़ीं जब प्रदीप की दो साल की बेटी मान्या ने नीरज के पास आकर पूछा, मम्मा सब लोग आ गए हैं, पापा कब आएंगे। उसके इतना कहते ही नीरज बेटी से चिपटकर रो पड़ी। 
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