नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में लगातार चल रहे महिलाओं के धरना-प्रदर्शन का असर कानपुर में भी पड़ा है। चमनगंज के मोहम्मद अली पार्र्क में पिछले चार दिनों से लगातार चल रहे धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बुर्कानशीन महिलाएं और छात्राएं भी शामिल हो रही हैं।
विज्ञापन
2 of 5
दिल्ली की तर्ज पर कानपुर में सीएए का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
लोकतंत्र बचाओ आंदोलन के बैनर तले शुरू हुए इस आंदोलन में मुस्लिमों के साथ-साथ तमाम हिंदू भी शामिल हो रहे हैं। मोहम्मद अली पार्क में चल रहे धरना-प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। चमनगंज जैसे इलाके में बुर्कानशीन महिलाओं के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने से लोगों को अचंभा हो रहा है।
विज्ञापन
3 of 5
दिल्ली की तर्ज पर कानपुर में सीएए का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार शाम चार बजे से धरना शुरू हुआ। बुर्कानशीन महिलाएं सीएए-एनआरसी के विरोध वाली तख्तियां लिए नजर आईं। खास बात यह है कि घर के कामकाज निपटाकर यहां पहुंची महिलाएं माइक पर इस कानून के विरोध में बोलती दिखीं। इंकलाब जिंदाबाद के नारे के साथ शुरू होने वाले प्रदर्शन में आजादी की नज्में, देशभक्ति के गीत गाए जाते हैं। आखिरी में राष्ट्रगान होता है।
4 of 5
दिल्ली की तर्ज पर कानपुर में सीएए का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम में मुस्लिम बुद्धिजीवी मोहम्मद सुलेमान, कुलदीप सक्सेना, सैयद अबुल बरकात नजमी रोजाना आते हैं। शुक्रवार को मुजीब इकराम, मुफ्ती आसिफ अनजार, विष्णु शुक्ला, आलोक अग्निहोत्री, प्रदीप यादव, सोनेलाल, डॉ. नफीस आदि ने विचार रखे। इनामुर्रहमान नश्तर, शेरू, मोहम्मद शारिक, अब्दुल्ला मलिक मौजूद रहे।
दिल्ली की तर्ज पर कानपुर में सीएए का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
मोहानी की बहू भी आगे आईं
शुक्रवार को स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हसरत मोहानी की बहू सबीहा मोहानी भी इस कानून पर मुखर हुईं। शारिक नक्शबंदी ने भी हिंदू-मुस्लिम एकता और संविधान पर लोगों को समझाया।