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लोकसभा चुनाव- 2019, 'गुटबाजी को गुडबाय' करने के लिए 'सपा की ये सियासी चाल'

Thu, 31 May 2018 08:03 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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अखिलेश यादव
गुटबाजी से निपटने के लिए लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी नया दांव आजमा सकती है। पार्टी हाईकमान यूपी के फर्रुखाबाद जिले से पिछड़ी जाति के ही किसी गैर यादव प्रत्याशी को चुनाव में उतार सकती है। एक कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदार को भी पार्टी यहां से प्रत्याशी बनाकर स्थानीय क्षत्रपों में जारी शीतयुद्घ को कुछ हद तक कम करने की कोशिश कर सकती है।
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डेमाे पिक
फर्रुखाबाद में पार्टी के भतीर पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के पुत्र सचिन यादव और अलीगंज के पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के पुत्र डॉ. सुबोध यादव के बीच लंब समय से गुटबाजी चल रही है। फर्रुखाबाद संसदीय सीट में अमृतपुर, भोजपुर, कायमगंज और फर्रुखाबाद विधानसभा के अलावा पड़ोसी जिले एटा की अलीगंज विधानसभा भी शामिल है। यहां करीब 13.33 लाख मतदाता है। इसमें पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या चार लाख से ज्यादा है।
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अखिलेश यादव
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के मुकेश राजपूत ने इस संसदीय सीट से चार लाख मतों से चुनाव में जीत हासिल की थी। सपा के रामेश्वर सिंह यादव 2.55 लाख मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। टिकट कटने के बाद सपा से बागी हुए पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के पुत्र सचिन यादव ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर 58 हजार मत हासिल किए थे। इस संसदीय सीट पर अच्छी संख्या में पिछड़ी जाति के मतदाताओं के चलते सपा यादव प्रत्याशी उतारती रही है।  
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डेमाे पिक
पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार गुटबाजी समाप्त करने के लिए गैरयादव प्रत्याशी उतारा जा सकता है। जबकि पूर्व सांसद चंद्रभूषण सिंह मुन्नूबाबू, महेंद्र कटियार, सचिन यादव, डॉ. सुबोध यादव समेत सात नेताओं ने इस सीट से अपनी दावेदारी के लिए पार्टी हाईकमान से गुहार लगाई है। सपा से टिकट पाने की दौड़ में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के दामाद डॉ. नवलकिशोर शाक्य भी शामिल हैं। 
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