संजीत अपहरण कांड में मंगलवार को पुलिस कोर्ट में पांच आरोपियों ज्ञानेंद्र, नीलू, सिम्मी, रामजी व कुलदीप के नार्को टेस्ट के लिए अर्जी दाखिल करेगी। पुलिस का दावा है कि अगर आरोपी नार्को टेस्ट कराने से इंकार भी कर देते हैं तो भी उनका अपराध साबित करने में मदद मिलेगी।
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
इस कांड में साक्ष्यों के नाम पर पुलिस के पास अभी तक सिर्फ संजीत की बाइक और किराये के कमरे व कार में मानव खून के निशान हैं। संजीत का बैग, मोबाइल, फिरौती में इस्तेमाल मोबाइल, फिरौती वाला बैग, बैग में रखा मोबाइल नहीं मिल सका है। सीओ और इंस्पेक्टर के अनुसार बंधक बनाने वाले कमरे और कार में मिले खून के मिलान के लिए पुलिस डीएनए टेस्ट कराएगी। इसके लिए बुधवार को संजीत के पिता चमन सिंह व मां कुसुमा देवी का सैंपल लिया जाएगा।
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मिल गया संजीत का मोबाइल
- फोटो : amar ujala
क्या है पूरा मामला
कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी।
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
23 जुलाई की रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया था कि कुलदीप संजीत के साथ सैंपल कलेक्शन का काम करता था। उसने रतनलाल नगर में किराये पर कमरा ले रखा था। 22 जून की रात शराब पिलाने के बहाने वह संजीत को अपने कमरे में लाया था।
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
इसके बाद उसे बंधक बना लिया था। चार दिन तक बेहोशी के इंजेक्शन देकर उसे बंधक बनाकर रखा था। 26 जून को कुलदीप ने अपने दोस्त रामबाबू और तीन अन्य के साथ मिलकर संजीत की हत्या कर दी थी। इसके बाद कुलदीप शव को अपनी कार में रखकर पांडु नदी में फेंक आया था।
तीन दिन बाद 29 जून की शाम को संजीत के पिता चमन सिंह यादव को फोन कर फिरौती मांगी गई थी। परिजनों ने पुलिस के कहने पर मकान, जेवर आदि बेचकर जैसे तैसे 30 लाख रुपयों की व्यवस्था की और 13 जुलाई को अपहर्ताओं को सौंप दिए थे लेकिन पुलिस अपहर्ताओं को नहीं पकड़ पाई और वे 30 लाख लेकर भाग निकले थे।