कानपुर के चौबेपुर में मुठभेड़ में पुलिसकर्मियों के शहीद होने के बाद पुलिस की टीमों ने रात से ही बदमाशों की लोकेशन ट्रेस करना शुरू कर दिया। तभी सूचना मिली कि कांशीराम नेवादा गांव की तरफ कुछ बदमाश देखे गए हैं। पुलिस और सर्विलांस की टीम रवाना हुई।
विज्ञापन
2 of 5
इसी रास्ते से भागे थे बदमाश
- फोटो : amar ujala
करीब छह घंटे तक पुलिसकर्मी खेतों और जंगलों में कांबिंग करते रहे। तभी एक बदमाश की लोकेशन गांव किनारे मंदिर में मिली। पुलिस के पहुंचते ही बदमाशों ने फिर गोली चलाई मगर यहां जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश ढेर कर दिए गए।
विज्ञापन
3 of 5
मौके पर जांच करती फोरेंसिक टीम
- फोटो : amar ujala
पुलिस सूत्रों के मुताबिक संदिग्धों से पूछताछ में बदमाशों के नाम और मोबाइल नंबर लिए गए। लगभग सभी नंबर बंद थे। ऐसे में पुलिस तड़के चार बजे से जंगलों में निशानदेही और सूचनाओं के आधार पर कांबिंग कर रही थी। इसी दौरान एक बदमाश अतुल दुबे का मोबाइल अचानक ऑन हुआ।
4 of 5
मुठभेड़ में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद
- फोटो : amar ujala
लोकेशन नेवादा गांव के पास दिखी। पुलिस की टीमें असलहों से लैस होकर गांव किनारे पहुंचीं। यहां बने प्राचीन मंदिर में लोकेशन ट्रेस हुई। आधे घंटे तक भटकने के बाद करीब दस बजे पुजारी का कमरा खोला। आहट होते ही बदमाशों ने फायरिंग की। दो सिपाही घायल हुए मगर पुलिस ने दोनों अतुल और प्रेमप्रकाश पांडेय को मार गिराया। उनके पास से लूटी गई एक रायफल और ग्लॉक पिस्टल बरामद की।
एडीजी एलओ और विकास दुबे एवं हमले में शहीद पुलिसकर्मी
- फोटो : amar ujala
पुलिस को आंखें दिखा रहा था बदमाश
पुलिस ने जब बदमाशों से सरेंडर करने को कहा तो वो पुलिस अधिकारियों को आंखें दिखा रहा था। फटकारने के बाद भी वह झुकने को तैयार नहीं था। तभी अचानक उसने गोली चलाई। फिर पुलिस ने भी गोली चला दी। पुलिस की पचास से अधिक टीमें अन्य बदमाशों की तलाश में पूरे प्रदेश में विकास दुबे के ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।