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मदर्स डे: कविता-चित्रों में झलकी ममता, अमर उजाला प्रतियोगिता के ये हैं 10 विजेता

Sun, 10 May 2020 03:00 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कविता-चित्रों में झलकी ममता - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला ने मदर्स डे के अवसर पर मां शीर्षक पर कविता और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। किसी ने कविता के माध्यम से तो किसी ने खूबसूरत चित्र से मां की ममता का वर्णन किया। काफी संख्या में प्रविष्टियां आई हैं। निर्णायक मंडल में कवि मुकेश श्रीवास्तव रहे जिन्होंने विजेताओं का चयन किया।

 
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टीना आहूजा, नेहरू नगर - फोटो : अमर उजाला
वो मां है,
कोई कहता है वो जगजननी की सूरत है,
मेरे लिए वो भगवान की मूरत है।
सबको खुश रखती है,
पर अपनी खुशी का ध्यान उसे कभी नहीं आता।
दिन ढलता है, रात आती है,
पर उसके हिस्से में दो पल भी आराम नहीं आता।
छुट्टियां तो आती हैं साल भर में न जाने कितनी,
पर जो उसको सुकून दे ऐसा कोई वार-त्योहार नहीं आता।
लॉकडाउन से चाहे सारे होटल बंद हो जाये,
पर उसकी रसोई में कभी ताला नजर नहीं आता।
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अनुराग शुक्ला, किदवई नगर - फोटो : अमर उजाला
बाजुओं में खींच के आ जायेगी जैसे कायनात,
अपने बच्चे के लिए ऐसे बाहें फैलाती है मां।
जिंदगी के सफर में, गर्दिशों में, धूप में,
जब कोई साया नहीं मिलता तब बहुत याद आती है मां।
प्यार कहते हैं किसे, और ममता क्या चीज है,
कोई उन बच्चों से पूछे जिनकी मर जाती है मां।
सफा-ए- हस्ती पे लिखती है, असूल-ए- जिंदगी,
इसलिए तो मकसद-ए- इस्लाम कहलाती है मां।
जब दीगर परदेस जाता है ए नूर-ए- नजर,
दुआएं लेकर सिर पे आ जाती है मां...।

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किरण सैनी, आईआईटी सोसाइटी, गोपालपुरम - फोटो : अमर उजाला
मां तुम्हें प्रणाम,
मां मुझे जन्म देकर, मेरा अस्तित्व जगाया है,
तुम कभी धूप कभी छाया बनकर आती हो।
मैं तुम्हारे फटी साड़ी के आंचल में छुप जाती थी,
आप हमे लोरी गा-गा कर समझाती थी।
देश के लिए तुम्हें कुछ कर दिखाना है,
वो आज त्रासदी का समय मां आया है।
मैं एक अच्छी डाक्टर योद्धा बन कर लोगों की सेवा करतीं हूं,
जब मैं नर्वस हो जाती हूं तब तुम मेरे फर्ज की बात समझा कर।
हौसला बढ़ाने की राह दिखाती हो, हौसला बुलंद करने के लिए,
मां आप रोज एक फोन कॉल कर मेरा मनोबल बढ़ाती हो, मां तुम्हें नमन।
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अंश श्रीवास्तव, बसंत विहार, नौबस्ता - फोटो : अमर उजाला
मां तो जन्नत का फूल है, प्यार करना उसका उसूल है,
दुनिया की मोहब्बत फिजूल है,  मां की हर दुआ कबूल है।
मां को नाराज करना,  इंसान तेरी भूल है,
मां के क़दमों की मिट्टी, जन्नत की धूल है।
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रिया सोनकर, श्याम विहार, बर्रा दो - फोटो : अमर उजाला
मसालों को नाप-तोल वह, जुबां पर स्वाद चढ़ा देती हैं,
न बाज आऊं जो मैं कभी, थप्पड़ का स्वाद भी चखा देती हैं।
हैरान हूं मैं यह सोचकर, मां इतना सब कुछ कैसे कर लेती है,
परेशान जब होती हूं मैं, मेरे बिना कुछ कहे सब समझ लेती हैं।
मां, बहन, दोस्त और नादान बच्ची, यह सब किरदार भी बड़े अच्छे से लेती हैं,
हैरान हूं मैं यह सोच कर, मां इतना सबकुछ कैसे कर लेती हैं।
 
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अंकिता गौतम, किसान नगर, कानपुर - फोटो : अमर उजाला
जाड़े के मौसम में,
मीठी सी धूप है मां।
दर्पण है जग सारा,
तो सुंदर सा रूप है मां।
तपन की ज्वलित संध्या में,
पवन की मंद बयार है मां।
मोती है जग सारा,
तो मोतियों का हार है मां।
तेरे बिना नहीं अस्तित्व हमारा,
तू ही जीवन का सार है मां।

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पारुल यादव, दबौली पश्चिम - फोटो : अमर उजाला
मां कबीर की साखी जैसी,
तुलसी की चौपाई सी।
मां मीरा की पदावली सी,
मां है ललित रूबाई सी।
मां वेदो की मूल चेतना,
मां गीता की वाणी सी।
मां त्रिपिटिक के सिद्ध सूत्र सी,
लोकोत्तर कल्याणी सी।

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शिल्पी सिंह, मलिक की बगिया, शिवकटरा - फोटो : अमर उजाला
मां की महिमा गाते-गाते,  बीत गई सदियां,
अब आज की माओं की दुविधा देख, सूख जाती नदियां।
ममता छोड़ूं या छोड़ूं नौकरी, छोड़ूं नौकरी तो भविष्य कहां,
मेरे बच्चों को हो न कोई कमी, बस इतनी सी है मां की दुनिया।
ऑफिस-घर में सामंजस्य बिठाते, टूट जाती उसकी दुनियां,
कभी बच्चे संभल न पाते, कभी ऑफिस वर्क में छूट जाती कमियां।
मां को कभी सुकून न मिलता, और सब बताते कमियां।

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 रिमझिम खरवार, मसवानपुर - फोटो : अमर उजाला
तुम से ही शुरू हुए हम, तुम पर ही खत्म,
तेरे लिए ही तो जीते हैं हम और तुम से ही उस जिंदगी को जीने की लगन।
तुम से ही सपने देखना सीखे हम,  और तुम से ही हैं उन सपनों का जतन,
मां आखिर तुम हो क्या, यह आज तक समझ ना पाए हम।
बागबान हो कि कोई फरिश्ता, खत्म हो जाए हर मुसीबत जब पड़े तेरे कदम।
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अल्का सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, डीजी पीजी कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
मां तू इक प्यारी सी सूरत है, या कहें कि तू ममता की मूरत है।
दुनिया चाहे जो कहे तुझे, पर मां तू दिल से बड़ी खूबसूरत है।
हम जिस मुकाम पर हैं, तेरे आशीष ने ही पहुंचाया हमें।
गिर-गिरकर संभलना, मां तूने ही तो सिखाया हमें।
जिंदगी के कदम-कदम पर मां, तेरी बहुत जरूरत है।
दुनिया चाहे जो कहे तुझे, पर मां तू दिल से बड़ी खूबसूरत है।
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