पिंटू हत्याकांड में आरोपियों के नाम हटाने के मामले में पुलिस का खेल उजागर करने लिए पुलिस जेल में बंद आरोपियों के बयान दर्ज करेगी। जिससे कि पता चल सके कि उनकी किस पुलिस कर्मी से कब और किन मुद्दों पर बात हुई थी। विवेचना के दौरान आरोपियों का नाम बाहर करने का सही मायने क्या खेल रहा।
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पिंटू सेंगर हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड में पुलिस ने महफूज समेत दो आरोपितों के नाम विवेचना के दौरान बाहर कर दिए थे। इसके अलावा उन्होंने इस मामले में वीरेंद्र पाल और मनोज गुप्ता के लिए कोर्ट में 169 की रिपोर्ट लगा दी थी।
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बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
जिसे कोर्ट ने खारिज कर कर दिया था। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर कई तरह के सवाल उठे थे। जिसके बाद डीआईजी ने एसपी पश्चिमी डॉ. अनिल कुमार को इसकी जांच सौंप दी थी। मामले में एसपी पश्चिम ने एक दर्जन से अधिक पुलिस कर्मियों को बयान देने के लिए नोटिस दिया है।
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बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
मगर फिलहाल कोई पुलिस कर्मी बयान देने उनके पास पहुंचा नहीं। एसपी के मुताबिक पुलिस भूमिका की जांच तभी सामने आ सकती है जब आरोपियों के बयान भी हो और उनसे जानकारी मिल जाए कि किस पुलिस कर्मी ने कब और किस सिलसिले में उनसे संपर्क किया था।
एसपी ने बताया कि आरोपियों के बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट से अनुमति लेने के बाद जेल जाकर बयान दर्ज कराए जाएंगे। उनके मुताबिक जब दोनों तथ्य सामने होंगे। तभी सच्चाई पता लग सकेगी कि आखिरकार आरोपितों को बाहर करने के पीछे कारण क्या था।