उत्तर प्रदेश के कानपुर में शनिवार को बसपा नेता को गोलियों से भून दिया गया। खून से लथपथ हालत में उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नरेंद्र सिंह सेंगर उर्फ पिंटू सेंगर एक दशक पहले उस समय सुर्खियों में आया था, जब 2010 में मायावती के जन्मदिन पर उसने बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए चांद पर जमीन खरीदने का दावा किया था। इसके बाद मायावती ने उसे पार्टी से निकाल दिया था।
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फूलन देवी (फाइल फोटो)
- फोटो : गूगल
हालांकि दो साल पहले पिंटू फिर से बसपा में आ गया था। वह सांसद रहीं फूलनदेवी का भी करीबी था। सूत्रों की मानें तो फूलन देवी ने ही राजनीति में उसकी एंट्री करवाई थी। वर्तमान में पिंटू भोगनीपुर से विधायक का चुनाव लड़ने की तैयारी में था। 2007 में बसपा से विधायकी का चुनाव लड़ा था, हालांकि हार गया था। पिंटू ने राजनीति में अच्छी पकड़ बनाई और विरोधियों की करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी जब्त कराई। तभी से उसकी दुश्मनी और बढ़ गई थी।
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बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
नरेंद्र के परिवार में पत्नी नीलम सेंगर, बेटी अपर्णा है। नरेंद्र चार भाइयों में सबसे बड़ा था। छोटे भाई धर्मेंद्र एयरफोर्स से रिटायर्ड हैं, देवेंद्र उर्फ बबलू सेना में हैं और शैलेंद्र फील्ड गन फैक्टरी में हैं। पिता सोने सिंह भी फील्ड गन फैक्टरी से रिटायर्ड हैं। नरेंद्र सिंह सेंगर और उसका परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है।
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बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
वह खुद बसपा का नेता रहा है। छावनी सीट से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था। बाद में उसे बसपा से निकाल दिया गया था। वर्तमान में इसके पिता सोने सिंह गजनेर (कानपुर देहात) के गोगामऊ से ग्राम प्रधान हैं। उसकी मां शांति कठेती से जिला पंचायत सदस्य हैं। पिंटू सेंगर की बसपा के साथ सपा में भी पैठ थी।
बसपा नेता की दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या
- फोटो : अमर उजाला
उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि उनके प्रधान पिता और जिला पंचायत सदस्य उनकी मां से शुरू होती है। पिछली बार देहात के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में वे सपा के राम सिंह से भले ही मात खा गए लेकिन सपा नेताओं के बीच उनका उठना बैठना बराबर रहा। वे सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के घर जा रहे थे। हत्या के बाद बसपा के अलावा सपा, कांग्रेस और भाजपा के भी कुछ नेता पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।