फतेहपुर में दुष्कर्म के बाद युवती को जलाने की घटना में ग्रामीण कुछ भी बोलना नहीं चाह रहे। आखिर किसने इनकी जुबान पर ताला लगाया है, यह कोई नहीं समझ पा रहा। गांव का कोई भी शख्स मुद्दे की बात छेड़ते ही चुप हो जाता है या फिर खिसक जा रहा। पुलिस के पचड़े में कोई नहीं पड़ना चाह रहा।
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फतेहपुर में दुष्कर्म के बाद युवती को जिंदा जलाया
- फोटो : अमर उजाला
घटना के दिन से पुलिस व प्रशासन के अलग-अलग बयान असमंजस भरे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात है। सीओ सिटी अपने स्तर पर गांव में निगरानी बनाए हैं। बता दें कि गांव में तनावपूर्ण जैसा माहौल नहीं है। यह जरूर है कि लोग काफी सहमे हैं। इस मुद्दे पर कुछ भी पूछते ही ज्यादातर ग्रामीण यह बता कर पल्ला झाड़ रहे कि, ‘हम उस समय पंचायत या पीड़ित व आरोपी के घर के आसपास नहीं थे’।
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फतेहपुर में दुष्कर्म के बाद युवती को जिंदा जलाया
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कई तो यह कह रहे कि हम गांव में ही नहीं थे। पीड़िता का गांव एक बड़ी ग्राम पंचायत का मजरा है। यहां की आबादी करीब डेढ़ हजार है। पिछड़ी और अनुसूचित जाति के लोग ज्यादा रहते हैं। अनुसूचित जाति के लोगों में शिक्षा का अभाव है। पीड़िता के घर में भी कोई सदस्य पढ़ा लिखा नहीं है। आर्थिक हालात भी कमजोर है। ऐसे ही हालात आरोपी के घर के हैं।
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फतेहपुर में दुष्कर्म के बाद युवती को जिंदा जलाया
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कई महिलाओं से घटना के दिन के हालात जानने की कोशिश की गई तो ज्यादातर का कहना था कि वह खेत गई थीं। सवाल उठता है कि आखिर ग्रामीणों ने ऐसा क्या देखा जो वह जुबान पर लाना नहीं चाहते। यदि वह खुलकर बोले तो क्या हो सकता है। वह पुलिस को भी कुछ बताने को तैयार नहीं है। गांव में चौबीस घंटे एक थानेदार मय फोर्स और थाने के एक दरोगा समेत पुलिस कर्मियों की टीम लगाई गई है।
सुबह से थरियांव थानेदार विनोद कुमार की टीम चहलकदमी करती दिखी। सीओ सिटी केडी मिश्रा दोपहर करीब दो बजे फोर्स की चाक चौबंद व्यवस्था की निगरानी करने पहुंचे और कई घंटे तक गांव में रहे। वह भी गांव के लोगों से टोह लेने में जुटे रहे। हालांकि किसी ने कुछ नहीं बताया। सीओ सिटी ने बताया हर 12 घंटे में ड्यूटी बदली जाएगी।