ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री (ओपीएफ) में बने उत्पाद एयरफोर्स, सेना, नेवी की ही पसंद नहीं बन रहे हैं बल्कि विदेश में भी इनका निर्यात हो रहा है। इंडोनेशिया के बाद मलयेशिया, तुर्केमेनिस्तान और उज्बेकि स्तान यहां के उत्पादों को खरीद रहे हैं।
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नए देशों के फैक्ट्री से जुड़ने से फैक्ट्री में उत्साह है। इंडोनेशिया 2006 से यहां के बने पैराशूट का नियमित ग्राहक है। लड़ाकू विमान सुखोई -30 के लिए ब्रेक पैराशूट खरीदता है। पिछले वर्ष मलयेशिया ने ट्रायल के तौर पर लड़ाकू विमान सुखोई-30 के लिए दो पैराशूट खरीदे थे। अब बड़ा ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
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इसी तरह तुर्केमेनिस्तान ने मिग 29 लड़ाकू विमान के लिए चार ब्रेक पैराशूट ट्रायल के तौर पर लिए हैं। उज्बेकिस्तान ने मिग-29 के लिए दो पैराशूट के आर्डर फैक्ट्री को दिए हैं। ओपीएफ के महाप्रबंधक जीसी राउत ने बताया कि भारत सरकार के अन्य देशों के साथ सैन्य समझौते के तहत इन देशों से भी कारोबार बढ़ाने के तहत इनका निर्यात किया जा रहा है।
मलयेशिया, तुर्केमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान यहां के उत्पादों को पसंद कर रहे हैं। यह आयुध निर्माणी के लिए बेहतर साबित होंगे। भविष्य में इसके कई लाभ देखने को मिलेंगे। यदि इन देशों के साथ निर्यात बढ़ता है तो आर्म्स फोर्स के साथ-साथ इन देशों से भी कारोबार बढ़ेगा। सरकार की नीति भी यही है।