उद्योगपति विक्रम कोठारी ने बैंकों को चूना लगाने में हर तरह का हथकंडा अपनाया। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि कर्ज की रकम को इधर से उधर करने में पेशेवर जालसाजी की गई।
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विक्रम कोठारी केस
- फोटो : अमर उजाला
सूत्र बताते हैं कि विक्रम कोठारी ने विदेश व्यापार यानी आयात और निर्यात के नाम पर लोन लिया। हकीकत ये है कि जिस कंपनी के नाम पर आयात के लिए लोन लिया वह विदेश से कुछ आयात करती ही नहीं थी। बाद में यह पैसा कोठारी की कंपनी यानी रोटोमैक ग्लोबल में वापस आ जाता था।
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इसी तरह निर्यात का ऑर्डर दिखाकर भी बैंकों से लोन लिया जाता था, लेकिन निर्यात करने के बजाय कंपनी पैसे को दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर देती थी। यह सिलसिला वित्तीय वर्ष 2007-08 से जारी था।
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इसी तरह कोठारी का मर्चेंट बैंकिंग के जरिये भी लोन की रकम हथियाने और उसे डुबाने का खेल किया। बताते हैं कि इसी दौर में डॉलर में गिरावट की वजह से इनकी हालत पतली हुई। उस समय इन्हें करीब पांच सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन स्थिति ऐसी नहीं आई थी कि बैंकों का कर्ज न चुकाया जा सके।
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कोठारी की इन कंपनियों में भी भागीदारी
कंपनियां निदेशक बने
मोहन स्टील्स लिमिटेड : मार्च, 2005
कोठारी फूड्स एंड फ्रेगरेंस फरवरी, 2014
वेस्ट कोस्ट एक्सट्रूजन सितम्बर, 2011
रोटोमैक पॉलीमर्स प्रा. लि. सितम्बर, 1998
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क्राउन एल्बा राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स फरवरी, 2005
आनंदेश्वर निर्माण प्रा. लि. जनवरी, 2011
सनराइज ग्लोबल मार्च, 2009
विक्रम कोठारी पर सीबीआई का शिकंजा अभी सिर्फ उनकी एक कंपनी रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड पर 3700 करोड़ रुपये के कर्जदारी न चुकाने के मामले में कसा गया है। यहां यह बताना जरूरी है कि विक्रम कोठारी करीब एक दर्जन अन्य कंपनियों के भी निदेशक हैं।
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इनमें से पांच कंपनियों पर कई बैंकों का करीब दो हजार करोड़ रुपये और बकाया है। इन कंपनियों के लोन खाते भी एनपीए हो गए हैं। कुछ के खाते एनपीए होने वाले हैं।
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सबसे पहले बात करते हैं कोठारी को लोन देने वाले बैंक समूह (कंसोर्टियम) के मुखिया बैंक ऑफ इंडिया की। इस बैंक का विक्रम कोठारी पर 1395 करोड़ रुपये का कर्ज है। इनकी चार कंपनियों के नाम से शहर की बिरहाना रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया ब्रांच में चार अलग-अलग खाते हैं। ये सभी खाते वर्ष 2015 में एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) हो चुके हैं।
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बैंक लगातार विक्रम कोठारी और फर्म के निदेशकों से पत्राचार करता रहा लेकिन कर्ज की रकम नहीं चुकाई गई। इन चार कंपनियों में से रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड पर 830 करोड़ ही कर्ज है जबकि तीन अन्य कंपनियों कोठारी फूड एडं फ्रेगरेंस, रोटोमैक एक्सपोर्ट, क्राउन अल्वा पर करीब 565 करोड़ का कर्ज है।
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इसी तरह यूनियन बैंक में भी कोठारी की अन्य कंपनियों पर करीब तीन सौ करोड़ का कर्ज है। इसके अलावा विक्रम कोठारी के व्यावसायिक और लोन खाते बैंक ऑफ बड़ौदा की माल रोड स्थित आईबीबी शाखा में भी हैं। अलग-अलग कंपनियों के नाम से यहां भी करीब दो सौ करोड़ का लोन है।
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ये सभी लोन खाते मार्च 2016 में एनपीए हो चुके हैं। इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इलाहाबाद बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स को मिलाकर करीब 800 करोड़ का और लोन है। कुछ छोटे बैंकों पर 100 से 200 करोड़ का लोन है।