इस बार मानसून में बादलों के बदले रवैये ने मौसम विज्ञानियों को भी परेशान किया। कहीं सामान्य से ज्यादा तो कहीं कम बारिश हुई। कानपुर में सामान्य (617.9 मिलीमीटर) से एक मिमी अधिक 624.1 मिलीमीटर बारिश हुई तो कानपुर देहात में सामान्य से 59 प्रतिशत कम रही।
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जलवायु परिवर्तन
- फोटो : अमर उजाला
इसी तरह फतेहपुर, हरदोई, जालौन, झांसी, महोबा, औरैया जैसे जिलों में बारिश की स्थिति सामान्य से भी कम रही। मानसून के इस दोहरे व्यवहार के पीछे जलवायु परिवर्तन की वजह से बादलों का दायरा सिकुड़ने की बात सामने आ रही है।
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जलवायु परिवर्तन से सिकुड़ रहा बादलों का दायरा
स्काईमेट मौसम विज्ञानियों के अनुसार मानसूनी सीजन में अरब सागर से उठने वाली हवाओं के साथ जो बादल आगे बढ़ते थे, उनसे ऐसा लगता था कि वे बड़े क्षेत्रफल में बारिश करेंगे। अध्ययन से पता चला है कि ऐसे बादल स्थानीय क्षेत्र पर बने दबाव की वजह से उतने ही दायरे में बरस जाते थे, जिससे कई बार मौसम की भविष्यवाणी भी गलत साबित हुई है। इस बदलाव को क्लाइमेंट चेंज (जलवायु परिवर्तन) के रूप में देखा जा रहा है। यह सिर्फ यूपी में ही नहीं दिल्ली, राजस्थान में भी देखा गया है। यूपी के पश्चिमी क्षेत्रों में इस बार 27 प्रतिशत कम बारिश के पीछे भी यही बात सामने आ रही है।
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इन शहरों में रही अच्छी बारिश
कानपुर बुंदेलखंड और प्रदेश के दूसरो जनपदों की स्थिति बारिश की स्थिति
कानपुर नगर में सामान्य से मात्र एक प्रतिशत ज्यादा
कानपुर देहात में सामान्य (672.2 मिलीमीटर) से 59 प्रतिशत कम
हरदोई में सामान्य (713.9 मिलीमीटर) से 16 प्रतिशत कम
फर्रुखाबाद में सामान्य (749.6 मिलीमीटर) से 36 प्रतिशत कम
फतेहपुर में सामान्य (775.1 मिलीमीटर) से 27 प्रतिशत कम
कन्नौज में सामान्य (695.1 मिलीमीटर) से 5 प्रतिशत ज्यादा
इटावा में सामान्य (614.1 मिलीमीटर) से 24 प्रतिशत कम
जालौन में सामान्य (726.1 मिलीमीटर) से 18 प्रतिशत कम
महोबा में सामान्य (675.3 मिलीमीटर) से 23 प्रतिशत कम
झांसी में सामान्य (757.6 मिलीमीटर) से 19 प्रतिशत कम
औरैया में सामान्य (578.4 मिलीमीटर) से 16 प्रतिशत कम
चित्रकूट में सामान्य (762.4 मिलीमीटर) से 10 प्रतिशत ज्यादा
बांदा में सामान्य (843.9 मिलीमीटर) से 13 प्रतिशत ज्यादा