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गांधी जयंती पर धर्मनगरी चित्रकूट में लगी नाथूराम गोडसे की मूर्ति, तनाव देखते हुए भारी फोर्स तैनात 

Wed, 03 Oct 2018 08:41 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगाई, पुलिस ने हटवाया 
- गांव में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति पुलिस बल तैनात
- एसडीएम व पुलिस ने जाकर मूर्ति हटवाई और चबूतरा नष्ट कराया
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नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगाई, पुलिस ने हटवाया
धर्मनगरी चित्रकूट में मंगलवार को जब पूरे जिले में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मनाई जा रही थी उसी समय थानाक्षेत्र के सगवारा गांव के पास बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे को प्रखर हिंदूवादी चिंतक व महान देशभक्त बताकर कुछ युवकों ने उनकी मूर्ति स्थापित कर दी। इसके बाद माल्यार्पण कर देशभक्ति के गीत गाने लगे। जानकारी होने पर राजापुर एसडीएम भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और छह युवकों को पकड़ लिया। पुलिस ने मूूर्ति को हटाकर उसे नष्ट करा दिया। गांव में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बनी रही लेकिन प्रशासन ने पुलिस बल तैनात कर इसे नियंत्रित कर लिया है। 
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गांव में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति पुलिस बल तैनात
राष्ट्रीय सनातन दल के संस्थापक बृजेंद्र पांडेय, आयोजक राघवेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष संदीप सिंह व प्रियंका पांडेय के नाम का बैनर गांव में लगा था। जिसमें नाथूराम गोडसे को प्रखर हिंदूवादी चिंतक व महान देशभक्त का उल्लेख कर तस्वीर लगी थी। इसी बैनर में देशभक्त सुभाष चंद्र बोस व रानी लक्ष्मीबाई के भी चित्र लगे थे। मंगलवार की दोपहर को पूर्व योजनानुसार एक दर्जन भगवा वस्त्र धारी युवक अचानक चबूतरे के पास पहुंचे और पहले से ही मंगाकर रखी गई नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगवा दी। इसके बाद देशभक्ति गीतों के बीच मूूर्ति पर माल्यार्पण शुरू किया।
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एसडीएम व पुलिस ने जाकर मूर्ति हटवाई और चबूतरा नष्ट कराया
इसकी जानकारी जिला प्रशासन को हुई तो राजापुर एसडीएम सुभाष यादव, सीओ शिवबचन सिंह व थानाध्यक्ष वीरेंद्र त्रिपाठी भारी पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस को देखते ही कई लोग भाग निकले जबकि पुलिस ने छह युवकों को पकड़ा लिया। जिनसे पूछताछ की जा रही है। एसडीएम ने बताया कि इनके खिलाफ कड़ी धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। 
  
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गांव में लगाया गया बैनर
एक सप्ताह पहले बनाया गया था चबूतरा
इस मामले में कोई भी ग्रामीण कुछ बोलने को तैयार नहीं है। पकड़े गए आरोपियों से पुलिस ने बातचीत नहीं करने दी, लेकिन आयोजक राघवेंद्र सिंह ने इतना जरूर बताया कि यह पहले से ही तय था। इसके लिए चबूतरा एक सप्ताह पूर्व बनवा लिया गया था। मूर्ति भी पहले चुपचाप मंगवा कर गांव के ही पास रखी गई थी। आज के ही दिन गांधी जयंती पर इसे लगाने की योजना बनी थी।
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