इटावा जिले में गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजने वाले चंबल के बीहड़ी क्षेत्र से खूंखार डकैतों का सफाया भी मुलायम की अहम उपलब्धि रहा है। कई दशकों तक बागियों की शरणस्थली रहे बीहड़ में 2003 से 2007 तक नया सवेरा हुआ।
चंबल के बीहड़ों में सुल्ताना डाकू, बाबा मुस्तकीम, मलखान सिंह, तहसीलदार सिंह, फूलन देवी, राम आसरे तिवारी उर्फ फक्कड़, निर्भय गुर्जर जैसे दस्युओं का आतंक रहा। सलीम गुर्जर, रज्जन गुर्जर, जगजीवन परिहार, अरविंद गुर्जर, रामवीर गुर्जर, कुसमा नाइन, मुन्नी पांडे, शीला इंदौरी, सरला जाटव की दशकों तक बादशाहत रही।
इटावा, औरैया, भिंड व मुरैना के सघन जंगलों में रहने वाले डकैतों ने उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, राजस्थान, मुंबई और ग्वालियर आदि स्थानों पर अपहरण का ऐसा काला धंधा स्थापित कर लिया था कि शाम होते ही लोगों में दहशत छा जाती थी। बच्चे घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते थे।