14 माह पहले इसी बांदा जेल में विधायक मुख्तार अंसारी करीब 22 माह तक रहे। तब सुरक्षा का हौव्वा इतना नहीं था, जितना इस बार है। इसे विकास दुबे एनकाउंटर का नतीजा ही माना जा रहा है कि अब मुख्तार को पंजाब से बांदा जेल में शिफ्ट करना सुरक्षा का हाईप्रोफाइल और हौव्वा बन गया है।
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मुख्तार अंसाली
- फोटो : PTI (File Photo)
विधायक मुख्तार अंसारी को लेकर मौजूदा समय में मचे सुरक्षा के शोर के पीछे शायद बिकरू कांड के आरोपी विकास दुबे का एनकाउंटर है। दूसरी तरफ प्रदेश सरकार द्वारा बड़े अपराधियों और माफिया पर कसे जा रहे शिकंजे की भी दलील दी जा रही है। बांदा जेल में 30 मार्च 2017 से 21 जनवरी 2020 तक निरुद्ध रहने के दौरान मुख्तार अंसारी को कई बार मुकदमों की पेशियों में प्रदेश के कई जनपदों में ले जाया जाता था। सुरक्षा के नाम पर पुलिस के वज्र वाहन के साथ मात्र एक छोटे चौपहिया वाहन में पुलिस बल जाता था।
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मुख्तार अंसाली
- फोटो : ANI
गिनेचुने पुलिस कर्मी होते थे। कभी कोई बवाल नहीं हुआ, लेकिन इस बार इसी बांदा जेल में दोबारा लाए जाने पर जबरदस्त किलाबंदी की गई है। जेल के अंदर से लेकर बाहर तक और आसपास इलाके में जबरदस्त चौकसी और पुलिस का पहरा है। इस बाबत कोई भी पुलिस या जेल अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। सबका बमुश्किल एक ही जवाब है कि शासन से जो निर्देश मिले हैं, उस पर अमल हो रहा है।
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बांदा जेल पहुंची यूपी पुलिस
- फोटो : एएनआई
जेल से रिहा और आए बंदियों की छानबीन
मुख्तार को जेल में सुरक्षित रखने के लिए जेल और जिला प्रशासन कवायदें कर रहा है। जेल में मौजूदा समय में करीब 780 बंदी हैं। इन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उधर, पिछले एक हफ्ते के अंदर जेल से जमानत पर रिहा होने वालों का पूरा चिट्ठा तैयार किया जा रहा है। साथ ही एक हफ्ते के अंदर किसी भी मामले में जेल आए बंदियों की भी जांच-पड़ताल और उनकी खुफिया जानकारी जुटाई जा रही है।
बांदा जेल में रहेगा मुख्तार अंसारी
- फोटो : अमर उजाला
जेल के आसपास के मकानों में पता किया जा रहा है कि कोई बाहरी आदमी किराये पर आकर तो नहीं बसा? शहर में भी यही जांच हो रही है। मुख्तार अंसारी के समर्थक और गुर्गे पिछली बार भी यहां किराये के मकानों में रहते रहे हैं। उन पर भी नजर रखते हुए छानबीन चल रही है।