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खनन घोटाला: मौरंग के पट्टों में रिपोर्ट देने वाले लेखपाल व रिटायर्ड वन दरोगा से फिर हुई पूछताछ

Wed, 04 Dec 2019 08:20 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
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अतिरिक्त सूचनाधिकारी के साथ कार्यालय जाते सीबीआई अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
हमीरपुर में खनन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई टीम बुधवार को दोबारा जिला सूचना कार्यालय पहुंची और अभिलेख खंगाले। वहीं खनिज कार्यालय व एसपी आवास स्थित गोपनीय कार्यालय भी गई। चित्रकूट में तैनात एक दरोगा, लेखपाल व रिटायर्ड वन दारोगा से सीबीआई ने निरीक्षण भवन में तलब कर कई घंटे तक पूछताछ की। सीबीआई की जांच अब 2007 से 2011 में वन क्षेत्र सीमा पर हुए मौरंग खनन के पट्टों में की गई गड़बड़ी पर है।

सीबीआई टीम मुख्यालय में दस दिनों से है। बुधवार को सीबीआई केे तीनों अधिकारी सूचना कार्यालय पहुंचे और अतिरिक्त जिला सूचनाधिकारी से वर्ष 2010 में सरीला क्षेत्र के बेंदा दरिया समेत अन्य इलाकों में मौरंग खनन पट्टों से संबंधित नीलामी की सूचनाओं के अभिलेख मांगे। काफी देर तक अभिलेख खंगाले गए। फिर सीबीआई की टीम सीधे पुलिस अधीक्षक के आवास पहुंची।
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निरीक्षण भवन के अंदर जाते चित्रकूट में तैनात दरोगा।  - फोटो : अमर उजाला
यहां एसपी के गोपनीय विभाग से अहम जानकारी जुटाकर टीम वापस अपने कैंप कार्यालय पहुंची। वहां सीबीआई ने सरीला क्षेत्र के बेंदा दरिया में मौरंग खनन के पट्टों की रिपोर्ट देने वाले तत्कालीन लेखपाल राकेश कुमार को दोबारा तलब कर पूछताछ की।

इसके बाद सरीला तहसील क्षेत्र के चिकासी थाने में तैनात रहे हेड कांस्टेबल हीरालाल को भी तलब कर पूछताछ की। वह मौजूदा समय में चित्रकूट में दरोगा के पद पर तैनात है। चिकासी में रहते दारोगा ने अवैध खनन करते पोकलैंड मशीनें और लिफ्टर पकड़ी थी।
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निरीक्षण भवन से निकलते लेखपाल राकेश कुमार।  - फोटो : अमर उजाला
बसपा सरकार में कारोबार करने वालों ने ही सपा में निकाली मौरंग 
पिछले 10 दिनों से अवैध खनन की जांच कर रही सीबीआई ने कई अहम साक्ष्य एकत्र किए हैं। जिनके तार थाना स्तर से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों से जुड़े हैं। वर्ष 2010 में जिन मौरंग कारोबारियों को खनन के पट्टे दिए गए थे। उन्हीं कारोबारियों ने उसके बाद भी खनन का खेल चलाया है। ऐसे में वर्ष 2009 से 2016 तक शासन स्तर से लेकर जिला स्तर तक के जारी पत्रों की जांच सीबीआई कर रही है।

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निरीक्षण भवन से बाहर निकलते रिटायर्ड वन दारोगा सत्यनानायण।  - फोटो : अमर उजाला
रिटायर्ड वन दरोगा को तलब कर लिए बयान
सीबीआई टीम ने बुधवार को वन विभाग के रिटायर्ड वन दारोगा सत्यनारायण को कैंप कार्यालय में तलब कर कई घंटे तक पूछताछ की। वह वर्ष 2010 में सरीला रेंज में तैनात रहे हैं। करीब तीन साल पहले वह रिटायर्ड होकर औरैया में अपने घर पर रह रहे हैं। सीबीआई की नोटिस पर रिटायर्ड वन दारोगा बुधवार को सीबीआई के समक्ष पेश हुए। उनसे मौरंग खनन के पट्टों में जारी एनओसी को लेकर लंबी पूछताछ की गई।
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एसपी आवास स्थित गोपनीय कार्यालय से बाहर निकलते सीबीआई अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
वन विभाग का कर्मचारी भागा
सीबीआई की नोटिस से वन विभाग में तैनात एक कर्मचारी डर के मारे भाग गया है। वह अपने घर भी नहीं पहुंचा। परिजन भी तीन दिनों से परेशान हैं। सरीला क्षेत्र के बेंदा दरिया में मौरंग खनन के पट्टे जारी करने के लिए एनओसी दी गई थी। वन क्षेत्र में खनन होने का गड़बड़ झाला सीबीआई ने पकड़ा है। इसमें डीएफओ, सरीला के रेंजर व दरोगा सहित आधा दर्जन कर्मचारियों से सीबीआई पूछताछ कर चुकी हैं। सीबीआई ने वन विभाग के बाबू को तलब किया है, लेकिन वह सीबीआई के डर से कार्यालय से ही भागा है। तीन दिनों से वह लापता है। विभागीय कर्मचारियों के साथ उसके परिजन भी परेशान हैं। वन विभाग के एक अधिकारी ने बुधवार शाम को बताया कि वह सीबीआई के डर से लापता है।
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सीबीआई ने फिर खंगाले खनिज विभाग में रिकॉर्ड
याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2010 में मौरंग खनन के पट्टों को लेकर नीलामी सूचनाएं तो जारी की गईं, लेकिन यह फाइलों तक सीमित रहीं। नीलामी सूचना की प्रतियां जिला सूचनाधिकारी को भी भेजकर प्रसार वाले अखबार में प्रकाशन के लिए कहा गया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वर्ष 2010 में तैनात रहे अतिरिक्त जिला सूचनाधिकारी का एक पत्र सीबीआई के हाथ लगा है। इस पत्र को लेकर खनिज विभाग में दोबारा सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।
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