उन्नाव के ऊगू कस्बे में लोगों के लिए शनिवार की रात सबसे लंबी रात रही। लोगों की आंखों में जो नमी दिखी वह उनमें अपने कस्बे की बहू के प्रति लगाव का प्रतीक था। शीला दीक्षित का भी अपनी ससुराल से लगाव कुछ कम न था। वह जब भी यहां आईं बहू की तरह ही सभी से मिलीं। 1996 के लोकसभा चुनाव में वह अपनी सुसराल के पोलिंग सेंटर से भी हार गई थीं। उन्हें इसका दुख भी था, लेकिन इसे कभी दिल से नहीं लिया। जो भी उनसे मिला, जिसने भी मदद मांगी, हर संभव मदद की।