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अखिलेश यादव के ट्वीट पर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य बचाव में उतरीं, कहा...डॉक्टरों का मनोबल न गिराएं नेता

Wed, 08 Apr 2020 09:36 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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अखिलेश यादव ने हैलट अस्पताल को लेकर किया था ट्वीट - फोटो : amar ujala
कानपुर हैलट अस्पताल में सही इलाज न मिलने से इंदिरा नगर के आनंद की मौत मामले में बयानबाजी तेज हो गई है। सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आनंद की मौत पर ट्वीट कर सरकार की व्यवस्थाएं अपर्याप्त बताने तथा कोरोना के डर से मेडिकल स्टाफ द्वारा मरीज की उपेक्षा संबंधी बयान पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने सिस्टम का बचाव किया है।

 
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कानपुर का हैलट अस्पताल - फोटो : amar ujala
उन्होंने व्यवस्थाएं दुरुस्त बताई हैं। विदित हो कि रविवार को इंदिरा नगर के डॉ. राकेश पांडेय अपने बेटे आनंद को गंभीर हालत में लेकर हैलट पहुंचे थे। उसे खांसी, सांस में दिक्कत थी। लेकिन कोरोना के डर से मेडिकल स्टाफ उसके पास जाने से कतराता रहा। राकेश को फ्लू ओपीडी का रास्ता बता दिया गया।

 
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हैलट में संक्रमण विभाग की ओर जाते डॉक्टर - फोटो : amar ujala
एक्सरे कराने के लिए वे खुद बेटे को स्ट्रेचर पर लेकर गए। इमरजेंसी में भर्ती कराया। जहां बाद में उसकी मौत हो गई। इस पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अफसोस जाहिर किया। उन्होंने ट्वीट में कहा, ये दुखद है कि कानपुर के एक डॉक्टर को एंबुलेंस और हैलट में स्ट्रेचर आदि अन्य चिकित्सीय सहायता के अभाव मेें अपना बेटा खोना पड़ा।

 

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हैलट में पसरा सन्नाटा - फोटो : amar ujala
ऐसे में सरकार व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण देकर ये सुनिश्चित करे कि कोरोना की आशंका की डर से मेडिकल स्टाफ किसी भी मरीज की उपेक्षा न करे। इस पर प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि इतने मुश्किल हालात में नेताओं से उम्मीद है कि वे डॉक्टरों का मनोबल बढ़ाएं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में दुनिया के किसी भी सेंटर के टक्कर का इंतजाम है। हमारे डॉक्टर्स, पुलिस, डीएम 24 घंटे काम कर रहे हैं।

 
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हैलट में संक्रमण विभाग की ओर जाते डॉक्टर - फोटो : amar ujala
आनंद की मौत पर प्राचार्य की सफाई
मरीज को डॉक्टरों ने पूरी तरह अटैंड किया। उसे तुरंत आईसीयू ले जाया गया। वह मानसिक रोगी था। उसकी मौत हाई बीपी, ब्रेन हेमरेज से हुई। उसके पिता से मेरी बात हुई। वह पूरी तरह संतुष्ट हैं कि उनके बेटे को तत्परता से इलाज मिला। यूपी गवर्नमेंट ने उत्कृष्ट काम किया है। यह कोरोना का मरीज नहीं था। गलती से कोरोना वार्ड में पहुंच गया। जहां प्रवेश निषेध होने से कोई नहीं मिला। मरीज को इमरजेंसी ले जाना चाहिए था।
 
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