कानपुर में मायावती की 24 अप्रैल को रमईपुर में होने वाली जनसभा में जातीय समीकरण को साधने की कवायद दिखी है। इस क्षेत्र के आसपास के कई गांव दलित और यादव बहुल हैं। खासकर रमईपुर में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि दलित, यादव और मुस्लिम मतदाताओं के संगम की वजह से इस क्षेत्र को जनसभा के लिए तरजीह दी गई है।
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मायावती (फाइल फोटो)
मायावती जनसभा के जरिये अकबरपुर और कानपुर नगर लोकसभा सीट के लिए संयुक्त रूप से प्रचार करेंगी। आयोजकों का जोर इस बात पर रहा कि जनसभा स्थल के आसपास का एरिया कैडर आधारित होना चाहिए। इस लिहाज से घाटूखेड़ा, निहालपुरवा, सगुनियापुरवा, तेजीपुरवा, प्रेमपुरवा, मगरासा, ओरियारा, रमईपुर समेत दर्जन भर से ज्यादा गांव जातीय समीकरण की गणित में फिट हैं।
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मायावती (फाइल फोटो)
शहरी क्षेत्र में भले ही सपा और बसपा के समर्थकों में दूरी दिख रही हो लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में सपा बसपा के गठबंधन से दोनों पार्टियों के कैडर मतदाता उत्साहित हैं। रमईपुर क्षेत्र वैसे तो अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है लेकिन यह कानपुर नगर का हिस्सा है।
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मायावती (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
कानपुर के करीब है। इस वजह से दोनों जिले के कार्यकर्ताओं को बंपर भीड़ जुटाने का टारगेट दिया गया है। इस सिलसिले में बसपा के जोनल प्रभारी नौशाद अली सपा के स्थानीय नेताओं से भी कई स्तर की वार्ता कर चुके हैं। कहा गया है कि पिछले चुनाव में मायावती की रैलियों में होने वाली भीड़ से चार गुना लोग यहां दिखने चाहिए।
लोगों की भीड़ ही गठबंधन की ताकत का प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा यह क्षेत्र दो लोकसभा क्षेत्रों को जोड़ता है। इस वजह से पार्टी समर्थकों को लाने ले जाने की व्यवस्था में कोताही नहीं होनी चाहिए। हालांकि यह जनसभा मायावती अकेले ही संबोधित करेंगी। गठबंधन के साथी सपा मुखिया अखिलेश यादव इसमें नहीं होंगे।