शहीद श्यामबाबू की पत्नी रूबी की तबियत ठीक नहीं है। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमले की खबर उन्हें पड़ोस की महिलाओं ने दी। पिछले 13 दिनों से मायूस दिख रही रूबी के चेहरे पर गर्व की खुशी दिखाई दी। वह पति के तस्वीर उठा लाईं और महिलाओं के साथ बैठ गईं।
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रुबी ने कहा कि आतंकियों का जड़ से सफाया होना जरूरी है। बोलीं, सेना में जाकर पति की शहादत का बदला लेना चाहती हैं। कहा कि, बेटे लकी को सैनिक स्कूल में पढ़ाकर सेना में भेजूंगी। जिससे वह अपने पिता का बदला लेकर आतंकियों को सबक सिखाकर शहीद श्यामबाबू के साथ साथ देश का बेटा कहलाए।
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शहीद श्यामबाबू की मंगलवार को तेरहवीं भी थी। बेटे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पिता रामप्रसाद फफक पड़े। बोले कभी सोचा भी नहीं था कि यह दिन उनके सामने आएगा। पिता के लिए इससे ज्यादा दुर्भाग्य पूर्ण कुछ और नहीं हो सकता है कि उसे बेटे की तेरहवीं में शामिल होना पड़े। लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाया।
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पाकिस्तान के आतंकियों के ठिकाने पर बमबारी की खबर के बाद आसपास के गांवों के लोग हाथों में तिरंगा झंडे लेकर रैगवां पहुंच गए। इन लोगों ने कहा कि दिलों में सुलग रही आग कुछ ठंडी हुई है।
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शहीद श्यामबाबू के अत्येष्टि स्थल पर श्रद्धांजलि देने आए लोगों की जुबां पर बस एक ही बात थी कि हमला जारी रहना चाहिए और आतंकवाद का सफाया होना चाहिए। ग्रामीणों के साथ शहीद के परिजन व उसका चार साल का बेटा लकी भी अंत्येष्टि स्थल पर पहुंचा।
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वह भी तिरंगा हाथों में लेकर पिता के अंत्येष्टि स्थल पर खड़ा रहा। स्माल गन फैक्ट्री कानपुर के ज्वाइंट जीएम ने मंगलवार को टीम के साथ शहीद श्यामबाबू के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। परिजनों को शुक्रवार को फैक्टरी में शुरू हो रहे कार्यक्रम का न्याेता भी दिया।
ज्वाइंट जीएम पवन कुमार, लेबर कमिशनर रोहित कुमार, छविलाल, अनिल शुक्ला, बन्ना शुक्ला, सतीश पांडेय व उमेश राम ने अंत्येष्टि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धाजंलि भी दी। बताया कि कार्यक्रम में परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद की जाएगी।