घर का काम लगभग पूरा हो गया है। पिताजी की आंख का ऑपरेशन भी करा दिया है। उन्हें उठने बैठने में जो दिक्कत थी वह भी अब कम हो गई है। आपके बचे-खुचे काम भी पूरे करा दिए हैं। मां...अब मैं जल्द नहीं आऊंगा। ड्यूटी पर जाते समय दीपक की कही इन बातों को मां रमा पांडेय दिन में कई बार दोहरा चुकी हैं। हर बार यही कहती हैं कि ऐसा पता होता तो बेटे को जाने ही न देती।
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चकेरी के मंगला विहार निवासी दीपक पांडेय बुधवार को कश्मीर के बड़गाम में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद हो गए थे। यहां घर पर कोहराम मचा हुआ है। मां पूरी रात नहीं सोईं, सिर्फ रोईं। परिवारीजन, रिश्तेदार और पड़ोसी दिलासा दे रहे हैं। बस एक ही रट लगाए हैं कि कोई मेरे दीपक को वापस कर दे। वे इससे भी ज्यादा गरीबी में दिन काट लेंगी, लेकिन उससे कोई काम नहीं करवाएंगी।
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उन्होंने दोपहर तक एक घूंट पानी तक नहीं पीया। कोई कुछ कहता तो हाथ जोड़ लेते। दीपक के ताऊ शिव प्रकाश एयरफोर्स से रिटायर हैं। वे रामप्रकाश के साथ एक ही घर में रहते हैं। वे सुबह से अपने कमरे से नहीं निकले। थोड़ी थोड़ी देर में परिवारीजन उनका हालचाल ले लेते हैं। लखनऊ से आईं शिव प्रकाश की बहन निर्मला देवी बताती हैं कि उन्हें बहुत गहरा सदमा लगा है। छह बहनों और चार बेटियों वाले इस पांडेय परिवार में दीपक से ही सारा घर रोशन था। उन्होंने बताया कि दीपक अपने ताऊ से प्रेरित होकर ही एयरफोर्स में गया था।
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श्याम नगर निवासी बुआ सुशीला तिवारी बताती हैं कि घर के कामों के प्रति जिम्मेदारी दीपक में बचपन से ही कूट कूटकर भरी थी। पिताजी को कम से कम काम करने देता था। नौकरी लगने के बाद वह जब भी छुट्टियों पर घर आता तो दौड़भाग ही किया करता था। फरवरी में आया तो घर की मरम्मत चल रही थी। वह मजदूरों को सामान उपलब्ध करवाने में जुटा रहता था। नहाना खाना तक भूल जाता था। उसे चिंता थी कि उसके जाने के बाद कहीं उसके पिता दौड़भाग न करनी पड़े। जाने से पहले कह भी गया था कि अब काफी काम हो गया। आप लोगों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
दीपक की गुजैनी में रहने वाली चचेरी बहन सुमन मिश्रा का रो-रोकर बुरा हाल है। सिसकियों के बीच वह बार-बार कह उठती हैं मुझे जीवन भर सहारा देने का दिलासा दिया और अब छोड़कर चला गया। सुमन ने बताया कि चार महीना पहले 31 अक्टबूर 2018 को उनके पति विजय मिश्रा का बीमारी से निधन हो गया था। दुख की उस घड़ी में सबसे ज्यादा सहारा दीपक ने ही दिया था। बचपन में उसे गोद में खिलाया था। एकलौता भाई होने की वजह से वह सभी की आंख का तारा था। उसे भगवान के घर जल्दी जाना था। इसीलिए सभी के दिल में इतनी जगह बना गया।