टॉयलेट में अखबार, मैग्जीन पढ़ने, मोबाइल का उपयोग कब्ज बढ़ा रहा है। पाखाना, पेशाब करते समय ऐसा नहीं करना चाहिए। उकड़ूू़ बैठने से बड़ी आंत और मलद्वार एक सीध में हो जाते हैं, जबकि कमोड में ऐसा नहीं होता। यदि मजबूरीवश कमोड पर बैठना हो तो बैठते समय दोनों पैरों के नीचे स्टूल रखना बेहतर होगा। सुबह पेट साफ होने के लिए तीन-चार गिलास पानी, चाय आदि पीना जरूरी नहीं है। जब प्यास लगे, तभी पर्याप्त पानी पीना चाहिए। रोज ढाई - तीन लीटर पानी पर्याप्त है। तेजी से वजन घटे, मल में खून आए, एक - दो महीने से पाखाना में बदलाव, पेट में दर्द कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
विज्ञापन
2 of 5
जानकारी देते डाॅक्टर
कानपुर मेडिकल कॉलेज में आयोजित आईएमए के 36 वें सीजीपी रिफ्रेशर कोर्स के चौथे दिन आडीटोरियम में मेदांता हॉस्पिटल, गुड़गांव के इंस्टीट्यूट आफ पाचन एंड हेपेटो बिलियरी साइंस के निदेशक डॉ. राजेश पुरी ने डॉक्टरों को बताया कि ज्यादातर लोगों को पेट साफ न होने की शिकायत रहती है। ऐसे 50 प्रतिशत लोगों की दिक्कत सामान्य उपायों से दूर हो सकती है।
विज्ञापन
कब्ज से बचने के उपाय
3 of 5
जानकारी देते डाॅक्टर
नियमित व्यायाम, फाइबरयुक्त भोजन, प्यास लगने पर पर्याप्त पानी पीना, सोते समय दूध पीना, मोशन करते वक्त अखबार मैग्जीन मोबाइल का इस्तेमाल न करना।
युवतियों में बढ़ा गाल ब्लैडर कैंसर
4 of 5
जानकारी देते डाॅक्टर
एसजीपीजीआई, लखनऊ के गेस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण राय ने बताया कि 20 से 35 साल की महिलाओं में गाल ब्लैडर स्टोन, कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। उनकी ओपीडी में रोज गाल ब्लैडर कैंसर पीड़ित चार-पांच नई महिलाएं आती हैं। प्रदेश में गंगा किनारे वाले क्षेत्रों में ऐसे रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी ठोस वजह पता नहीं चल पाई है। उनका मानना है कि कुछ लोगों के शरीर में ऐसे जीन होते हैं, जो यहां के वातावरण से मिलकर कैंसर करते हैं। गंगा बेल्ट में कैंसर पर बृहद शोध की जरूरत है। इसके लिए एसजीपीजीआई आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च) को पत्र लिखेगा। यदि पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो, जो पीछे की तरफ जाए तो सतर्क हो जाना चाहिए।
सीजीपी के दूसरे सत्र में ‘डिबेट - मॉक ट्रायल इन द ओरेनेबल कोर्ट’ में न्यायालय की तरह दो केसों पर चर्चा में पता चला कि ऑपरेशन होंगे तो कांप्लीकेशन भी होंगे। डॉक्टरों को ऐसी परिस्थितियों में क्या करना चाहिए, क्या नहीं। पक्ष और विपक्ष की बातें सुनने के बाद निष्कर्ष निकला कि ऐसी स्थिति में तुरंत तीमारदारों को पूरी जानकारी देना चाहिए। उनसे संवादहीनता विवाद की वजह बनती है। एसजीपीजीआई की डॉ.अनिता सक्सेना जज और नार्थ जोन, यूएस के अध्यक्ष डॉ. अनिल इहलेंस, डॉ. एसके मिश्रा, डॉ. अनिल जैन, डॉ. कंचन शर्मा ज्यूरी मेंबर बनीं।