देवोत्थानी एकादशी के बाद एक नवंबर से बृहस्पति के अस्त हो जाने से वर्जित चल रहे मांगलिक कार्य गुरुवार से फिर शुरू हो जाएंगे, जो 12 दिसंबर तक चलेंगे। 13 दिसंबर से शुक्र अस्त हो रहे हैं। जो चार फरवरी को उदय होंगे। यानि इस बीच भी मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
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दिसंबर में छह शुभ लग्न हैं। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग इन्हीं लग्नों में विवाह की तैयारी में हैं। इधर, नवंबर की लग्नें भी तेज हैं।
पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि गुरुवार से सहालग फिर शुरू हो रहीं हैं, जो महज 12 दिसंबर तक चलेंगी। इसके बाद फिर चार फरवरी से ही वैवाहिक लग्न शुरू हो सकेंगी।
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नवंबर माह में 16 नवंबर से 30 नवंबर तक विवाह मुहूर्त हैं। पंडित पवन शुक्ला के मुताबिक दिसंबर में शादी की सिर्फ छह लग्नें ही हैं। दिसंबर में 5, 8, 9, 10, 11 व 12 को विवाह हो सकेंगे।
13 दिसंबर से शुक्र अस्त होने और खरमास होने से सहालग रुकेंगी। नवंबर में 23 व 29 को गौना हो सकेगा। वहीं इस माह में यज्ञोपवीत का कोई मुहूर्त नहीं है।
दिसंबर में 4, 7, 13 व 14 को गौना हो सकेगा। लेकिन इस पूरे माह भी यज्ञोपवीत का कोई मुहूर्त नहीं है।
13 दिसंबर को शुक्र अस्त होने से खरमास लग जाएगा। इस कारण जनवरी 2018 में पूरे माह भर एक भी वैवाहिक लग्न नहीं मिलेंगी।
पंडित कात्यायनी मिश्रा ने बताया कि दिसंबर 2017 में 13 दिसंबर से शुक्र अस्त हो रहे हैं और इसके बाद खरमास के चलते शादियां नहीं हो सकेंगी।
फरवरी में 3-4 फरवरी को शुक्र उदय होगा। इसके बाद ही अच्छे काम शुरू हो सकेंगे। वहीं, वैवाहिक लग्नें सात फरवरी से शुरू होंगी।