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Lockdown: टिकट के लिए बिकवा दी पायल, गरीब मजदूरों से हुई जमकर वसूली, 650 वाला टिकट 800 में बिका

Fri, 08 May 2020 09:20 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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टिकट दिखाती श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आई महिला - फोटो : amar ujala
लॉकडाउन में फंसे श्रमिकों ने गुजरात से आने के लिए किसी ने पायल बेचकर तो किसी ने घर से पैसे मंगाकर रेल का टिकट खरीदा। वसूली करने वालों ने गरीब मजदूरों को भी नहीं बख्शा। श्रमिकों से वास्तविक किराया 650 के बजाय 750 से 800 रुपये प्रति यात्री के हिसाब से वसूली की गई।

 
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कानपुर पहुंचे तो चेहरे पर झलकी खुशी - फोटो : amar ujala
यह दुखड़ा वहां से आए श्रमिकों ने बयां किया। गुजरात के सूरत से शुक्रवार को 1187 प्रवासी श्रमिकों को लेकर स्पेशल ट्रेन दोपहर सवा तीन बजे सेंट्रल स्टेशन पहुंची। यहां से मजदूरों को 41 बसों से उनके जिलों में भेजा गया। 

 
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सभी की थर्मल स्कैनिंग की गई - फोटो : amar ujala
वसूली के मामले में रेलवे अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि न तो हम टिकट का पैसा ले रहे हैं और न ही रास्ते में टिकट चेक किया जा रहा है। राज्य सरकार को इकट्ठा टिकट दे देते हैं। इसका 85 प्रतिशत रेलवे और 15 प्रतिशत राज्य सरकार को वहन करना है।

 

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बसों से भेजा गया घर - फोटो : amar ujala
61 जिलों के मजदूरों को किया रवाना
सूरत से आई ट्रेन में प्रदेश के 61 जिलों के श्रमिक थे। अभी वहां अन्य मजदूर भी बचे हैं लेकिन इसके लिए कई और ट्रेनों को चलाना पड़ेगा। इसमें कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, प्रयागराज, बांदा, हमीरपुर, उन्नाव, कन्नौज, फर्रुखाबाद, महोबा, चित्रकूट, रायबरेली, सीतापुर, फैजाबाद, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, बस्ती, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, जालौन, सुल्तानपुर, अमेठी आदि जिलों के लोग थे। कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर बने आठ काउंटरों में मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद रजिस्ट्रेशन कराया गया।
 
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बच्चों की भी हुई थर्मल स्क्रीनिंग - फोटो : amar ujala
जिला प्रशासन का रवैया रहा सुस्त
श्रमिकों के लिए रेलवे के बाद रोडवेज बसों की व्यवस्था ही कारगर साबित हुई। जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्था सुस्त रही। यहां पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए न तो उपयुक्त संख्या में पुलिस बल था और न ही सिविल डिफेंस के लोग सक्रिय दिखे।
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