जम्मू कश्मीर के बड़गाम में भारतीय वायु सेना का विमान एमआई-17 क्रैश हो गया। इस दुर्घटना में कानपुर निवासी कारपोरल दीपक पांडेय की जान चली गई। एक फरवरी को जब दीपक का पार्थिव शरीर कानपुर स्थित उनके आवास पहुंचा तो पूरे घर में कोहराम मच गया।
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दो दिन का इंतजार खत्म होने को था। अंतिम दर्शन को आस-पास और दूर-दराज से आए लोग सड़क पर तो रिश्तेदार और परिवार वाले छत पर खड़े रहकर दीपक के पार्थिव शरीर के आने की राह देख रहे थे।
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शुक्रवार सुबह 8 बजे से हर आंख घर की ओर आने वाली सड़क पर टकटकी लगाए थी। किसी भी वाहन के आने पर दीपक तुम अमर रहो, भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा दीपक तेरा नाम रहेगा के जयकारे गूंज उठते।
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सुबह 10:20 बजे एयर फोर्स का विशेष वाहन शहीद दीपक के पार्थिव शरीर को लेकर घर की ओर मुड़ा। वैसे ही छत पर खड़ी फुफेरी बहन कुमुद जोर से चिल्ला पड़ी। बोली, अम्मा! लो दीपक आ गए और अगले ही पल फफक कर रो पड़ीं।
उसकी आवाज छत और सड़क पर खड़े जिस-जिस के कानों में पड़ी तो वह उसे बिलखता हुआ देख खुद को भी नहीं रोका सका। वहां मौजूद हर आंख से आंसू छलक पड़े। पास खड़ी महिला रिश्तेदारों ने कुमुद को किसी तरह संभाला।