कानपुर के किडनी कांड में नया खुलासा हुआ है। किडनी के सौदागरों ने दलाली की फ्रेंचाइजी बांटी थी। ट्रांसप्लांट के नेटवर्क को 'फ्रेंचाइजी मॉडल' की तरह खड़ा किया था। सरगना रोहित ने कई जिलों के अस्पतालों में दलाल सक्रिय कर रखे हैं।
कानपुर के किडनी कांड की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सरगना रोहित ने अवैध ट्रांसप्लांट के इस नेटवर्क को किसी संगठित 'फ्रेंचाइजी मॉडल' की तरह खड़ा कर रखा था। इसमें अलग-अलग जिलों में दलाल सक्रिय थे।
ये एजेंट कमीशन में मिलने वाली रकम के लालच में किडनी डोनर और जरूरतमंद खरीदारों को तलाश कर गिरोह से जोड़ते थे। कानपुर और जालौन में शिवम अग्रवाल जिम्मेदारी संभालता था। वह है तो एंबुलेंस चालक लेकिन एप्रिन और स्टेथेस्कोप डालकर डॉक्टर बनकर घूमता था।
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आरोपी शिवम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वह जरूरतमंदों को खोजकर किडनी के काले कारोबार से जुड़े सौदागरों तक पहुंचा देता था। मूलरूप से बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष चौधरी उसके ही संपर्क में था। उसने ही उसे किडनी बेचने को राजी किया था।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मरीजों और डोनर को अस्पताल तक लाने-ले जाने का काम भी शिवम करता था। वहीं, कानपुर देहात के मूसानगर निवासी नरेंद्र सिंह, कल्याणपुर स्थित प्रिया अस्पताल का संचालक है। उसे भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार
- फोटो : पुलिस
उसका काम कानपुर देहात में लोगों को बेहतर इलाज का झांसा देकर कानपुर लाना रहता था। उसके अस्पताल में ही ट्रांसप्लांट के बाद आयुष की किडनी खरीदने वाली पारुल को रखा गया था।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ में वैभव मुद्गल और अफजल की भूमिका सामने आई है। अफजल ही मेरठ से किडनी खरीदने वाली पारुल को नेटवर्क तक लेकर आया था। वह अस्पतालों से डायलिसिस कराने वालों की जानकारी जुटाता था।
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Kidney Racket
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
गाजियाबाद का परवेज सैफी भी लोगों को ढूंढता था साथ ही ट्रांसप्लांट टीम के सदस्यों को लाने ले-जाने का काम करता था। पंजाब के मोहाली के नवनीत सिंह ने तरण तारण के मनजिंदर सिंह को किडनी खरीदने के लिए तैयार किया था।
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मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पारुल की जांच करते मैडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लखनऊ के भूपेंद्र सिंह, हापुड़ के कुलदीप सिंह राघव, राजेश कुमार तोमर और प्रयागराज के नवीन पांडेय जैसे कई अन्य नाम भी जांच में सामने आए हैं।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नेपाल भाग सकते हैं आरोपी, निगरानी तेज
किडनी कांड के खुलासे के 11 दिन बाद भी पुलिस डॉ. रोहित और उसके अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पुलिस को मामले में नामजद डॉ. रोहित, वैभव मुद्दगल और अनुराग को तलाश कर रही है। हालांकि, अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लगा है।
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डॉ. प्रीति आहूजा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए नेपाल भाग सकते हैं। ऐसे में पुलिस की टीमों ने नेपाल बॉर्डर वाले इलाकों में निगरानी तेज कर दी है। 29 मार्च को मसवानपुर इलाके में स्थित आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना पर पहुंची पुलिस ने 31 मार्च दबिश दी थी।
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इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी कांड
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहां से साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने पनकी कल्याणपुर रोड स्थित प्रिया अस्पताल में छापा मारा जहां पारुल तोमर भर्ती मिलीं। उनके किडनी लगाई गई थी जबकि आवास-विकास कल्याणपुर के मेडलाइफ अस्पताल में बिहार के बेगूसराय का आयुष चौधरी भर्ती मिला।
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kanpur kidney scam
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उसकी किडनी निकाल कर ही पारुल को लगाई गई थी। इसके बाद 31 मार्च कोरिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उसके पति सुरजीत सिंह आहूजा, शिवम अग्रवाल और मेडलाइफ व प्रिया अस्पताल के संचालकों को गिरफ्तार किया था।
जांच के लिए पहुंची पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोपियों से पूछताछ में गाजियाबाद के डॉ. रोहित, डॉ. वैभव मुद्गल, डॉ. अनुराग अली और अफजल का नाम सामने आया था। पुलिस ने इनमें से डॉक्टर रोहित, अफजल व ओटी मैनेजर अली पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया है।