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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड: कानपुर पुलिस ने ढूंढ लिया संजीत का मोबाइल लेकिन अभी तक नहीं मिला शव

Wed, 19 Aug 2020 08:43 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड - फोटो : amar ujala
कानपुर पुलिस ने संजीत अपहरण एवं हत्याकांड में एक अहम साक्ष्य ढूंढ निकाला है। एसपी साउथ दीपक भूकर पिछले तीन दिनों से अपनी टीम के साथ संजीत के मोबाइल की तलाश कर रहे थे। संजीत अपहरण एवं हत्याकांड के मुख्य आरोपी रामजी ने बताया था कि उसने मोबाइल को नाले में फेंका था। बता दें कि यूपी सरकार इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग केंद्र को भेज चुकी है।
 
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मोबाइल की तलाश करते एसपी साउथी दीपक भूकर की टीम - फोटो : amar ujala
एसपी साउथी ने अपनी टीम के साथ 15 अगस्त को मोबाइल की तलाश शुरू की थी। सोमवार को नाले को पंपिंग सेट लगा कर खाली कराया गया और फिर मोबाइल की तलाश की गई। इस दौरान सर्च टीम को एक मोबाइल मिल गया। बताया जा रहा है यह वही मोबाइल है जो संजीत इस्तेमाल करता था।

 
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kanpur kidnapping case - फोटो : amar ujala
क्या है पूरा मामला 
कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी।
 

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शव की तलाश में जुटी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
23 जुलाई की रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया था कि कुलदीप संजीत के साथ सैंपल कलेक्शन का काम करता था। उसने रतनलाल नगर में किराये पर कमरा ले रखा था। 22 जून की रात शराब पिलाने के बहाने वह संजीत को अपने कमरे में लाया था।
 
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kanpur kidnapping case - फोटो : amar ujala
इसके बाद उसे बंधक बना लिया था। चार दिन तक बेहोशी के इंजेक्शन देकर उसे बंधक बनाकर रखा था। 26 जून को कुलदीप ने अपने दोस्त रामबाबू और तीन अन्य के साथ मिलकर संजीत की हत्या कर दी थी। इसके बाद कुलदीप शव को अपनी कार में रखकर पांडु नदी में फेंक आया था।

 
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड - फोटो : amar ujala
तीन दिन बाद 29 जून की शाम को संजीत के पिता चमन सिंह यादव को फोन कर फिरौती मांगी गई थी। परिजनों ने पुलिस के कहने पर मकान, जेवर बादि बेचकर जैसे तैसे 30 लाख रुपयों की व्यवस्था की  और 13 जुलाई को अपहर्ताओं को सौंप दिए थे लेकिन पुलिस अपहर्ताओं को नहीं पकड़ पाई और वे 30 लाख लेकर भाग निकले थे।
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