ब्रजेश के पिता शिवनाथ का अभी भी रोकर बुरा हाल है। वह घर पहुंचने वाले हर व्यक्ति से एक ही बात कहते हैं कि अपहरण करने वाले फिरौती ले लेते, बेटे को क्यों मार डाला। उसकी तो किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी। उसने परिजनों के साथ मिलकर फिरौती देने के लिए खेती और गहने बेचने का इंतजाम कर लिया था। बस अपहरणकर्ताओं के फोन का इंतजार करते रहे।
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Kidnapping Case
- फोटो : amar ujala
चौरा गांव निवासी शिवनाथ पाल ने बताया कि पुलिस अपना काम कर रही थी, लेकिन हम लोग फिरौती लेने के लिए अपहरणकर्ताओं के फोन का इंतजार कर रहे थे। उनके पास 20 लाख रुपये नहीं थे, लेकिन रिश्तेदार पैसा जुटाने को तैयार हो गए थे। रिश्तेदार बार-बार फोन कर पूछ रहे थे कि रुपये लेकर कब आ जाएं।
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उनसे कहा था कि अपहरणकर्ताओं का फोन आने के बाद सभी को बता देंगे। सोचा था कि फिरौती देकर बेटे को छुड़ाने के बाद जमीन बेच कर कर्ज चुका देंगे। यह बात वह पुलिस को भी नहीं बताना चाहते थे। हत्यारा तो ब्रजेश का साथी ही निकला। फिरौती की एक बार मांग करके उसी दिन हत्या भी कर दी।
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इसमें और लोग भी शामिल हैं। सभी को सजा मिलनी चाहिए। सुबोध सचान किसी दबाव में घटना को अकेले अंजाम देने की बात स्वीकार रहा है। ब्रजेश कंप्यूटर, टीवी की मरम्मत और बिजली की वायरिंग कर लेता था। जब भी गांव का कोई उसे बुलाता तो तुरंत चला जाता था।
ससुराल से रुपये मंगाने की बात कर ली थी
बहन अनीता ने भाई को छुड़ाने के लिए ससुराल से रुपये मंगाने की बात कर ली थी। भाई ब्रजेश को छुड़ाने के लिए। कहा कि उसने अपने सब गहने बेच देने के लिए तैयारी कर ली थी। सहयोग करने के लिए सभी रिश्तेदार तैयार थे। हत्यारों ने वह मौका भी नहीं दिया। परिवार के लोग अलग-अलग ब्रजेश के मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास करते रहे। वह बंद बताता रहा।