विकास दुबे चुनावों में कई नेताओं की आर्थिक मदद करता था। बदले में नेता उसे राजनीतिक संरक्षण देते थे। बिकरू कांड सुनियोजित साजिश थी। इसमें आईपीएस व पीपीएस अफसरों के अलावा कई पुलिसकर्मी शामिल थे।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के एक विधायक व वरिष्ठ आईएएस अफसर का भी संरक्षण था। ये आरोप अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने बिकरू कांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग को दिए शपथपत्र में लगाए हैं।
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ ने शपथपत्र में बताया है कि विकास व जय के साथ पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की सांठगांठ के संबंध में कई ऑडियो-वीडियो भी आयोग को सौंपे जा चुके हैं। आरोपों व इनकी संपत्तियों की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
विकास दुबे ने जय के माध्यम से कई नेताओं की संपत्तियों में रुपया लगाया था। इसके प्रमाण भी जांच एजेंसियों को दिए गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
गैंगस्टर जय बाजपेई और विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
अफसरों ने भुगता कार्रवाई का खामियाजा
विकास दुबे, जय व उनके गिरोह पर जिस अफसर ने कार्रवाई की कोशिश की, उसे प्रताड़ित किया गया। सजा के तौर पर साइड पोस्टिंग दी गईं। इनमें कन्नौज के एएसपी रहे केसी गोस्वामी, बजरिया एसओ धीरेंद्र सिंह चौहान व नजीराबाद एसओ आमोद कुमार सिंह के नाम प्रमुख हैं।