कानपुर के कातिल बाप ने जुड़वां बेटियों को हत्या से पहले नशीली दवा दी थी। इसके बाद गला काटा था ताकि बचने का मौका नहीं मिले। जुड़वां बेटियां बचने के लिए संघर्ष तक नहीं कर पाईं। दोनों की श्वास नली कटी थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के भी हाथ कांप गए।
कानपुर में जुड़वां बेटियों की हत्या के मामले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। कातिल बाप ने जुड़वां बेटियों रिद्धि और सिद्धि के गले चापड़ से काटने से पहले उन्हें नशीली दवा दी थी। इसके चलते वह बचने के लिए संघर्ष तक नहीं कर पाई।
पैनल और वीडियोग्राफी में किए गए पोस्टमार्टम में इस बात की पुष्टि डॉक्टरों ने की है। डॉक्टरों के अनुसार, यही कारण है कि बच्चियों को बचने का मौका तक नहीं मिला। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि पहली बार किसी केस में हाथ कांप गए।
डॉक्टरों के अनुसार, गर्दन पर वार इतने गहरे थे कि दोनों बेटियों की श्वास नली काफी गहरी कट गई थी। अत्यधिक रक्तस्त्राव से उन्हें बचने का मौका नहीं मिला और उनकी सांसें थम गईं।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं, दर्दनाक घटना के बाद पूरे अपार्टमेंट में मातम पसर गया। हर कोई बस यही पूछता रहा कि आखिर एक पिता का दिल इतना पत्थर कैसे हो गया कि उसने अपनी ही जुड़वां बेटियों को इतनी भयानक मौत दी।
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आरोपी पति के खिलाफ एफआईआर कराती बच्च्यिों के मां
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शाम करीब छह बजे मासूमों की मां रेशमा अपनी ननद वाराणसी निवासी स्वास्तिका और बुआ सास पूनम तिवारी के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं। शवों को कब्रिस्तान में दफना दिया गया है।
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इसी कमरे में हुई थी बच्चियों की हत्या
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कैमरे क्या करते जब पिता बन गया हत्यारा
दवा कंपनी के सेल्स मैनेजर शशिरंजन ने परिवार की सुरक्षा के लिए हजारों रुपये खर्च कर चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे हैं। ये कैमरे भी उसकी बच्चियों की सुरक्षा नहीं कर सके। टू बीएचके फ्लैट में अंदर छह कैमरे लगे हैं।
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इसी सोसायटी में की गई जुड़वां बहनों की हत्या
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शशिरंजन ने बाहरियों से परिवार की सुरक्षा के लिए फ्लैट के बाहर दो कैमरे लगा रखे थे। ड्राइंग रूम, किचन और बेडरूम और लॉबी में कैमरे लगवाए थे। पूरे फ्लैट में सिर्फ पत्नी वाले कमरे और बाथरूम में कैमरे नहीं थे।
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घटना के बाद जांच करती पुलिस
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जिस कमरे में दोनों बेटियों की हत्या की गई उसमें भी कैमरा लगा था। पत्नी रेशमा ने कहा कि सास गीता मिश्रा की मौत पिछले साल हुई है। उसके बाद पति का चिड़चिड़ापन और बढ़ गया। हालांकि इस बात का अंदेशा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। वरना वह बेटियों को अपने पास ही सुलाती।
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बिलखती मां
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कानपुर में जुड़वां बेटियों का कत्ल
कानपुर के किदवईनगर के-ब्लॉक स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में शनिवार देर रात पिता शशिरंजन मिश्रा ने अपनी 11 साल की जुड़वां बेटियों रिद्धि-सिद्धि की नृशंस हत्या कर दी। आरोपी ने एक-एक कर दोनों बेटियों की गला दबाकर हत्या कर दी। बचने की गुंजाइश न रहे इसलिए गले पर चापड़ रखकर हथौड़े से वार किए। आरोपी ने वारदात से पहले बच्चियों को नशीली दवा भी खिलाई थी। पूरी वारदात कमरे में लगे सीसीटीवी में कैद है।
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बिलखती मां से जानकारी लेते पुलिसकर्मी
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हत्याकांड के डेढ़ घंटे बाद आरोपी ने तड़के खुद ही पुलिस कंट्रोल रूम पर सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस को बच्चियों के रक्तरंजित शव बेडरूम की फर्श पर पड़े मिले। पुलिस ने दूसरे कमरे में छह साल के बेटे संग सो रही मां रेशमा को जगाकर हत्याकांड की जानकारी दी तो वह बदहवास हो गईं।
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आरोपी पिता और रिद्धी और सिद्धी की फाइल फोटो
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आरोपी ने बेटियों की हत्या का कारण नहीं कबूला
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि उसने पुलिस के सामने बेटियों की हत्या का कारण नहीं कबूला है। लखनऊ निवासी बैंककर्मी विवेक गुप्ता का त्रिमूर्ति अपार्टमेंट के भूतल में जी-4 फ्लैट है।
आरोपी ने 2014 में मंदिर में किया था प्रेम विवाह
इसे उन्होंने मूलरूप से बिहार के गया निवासी शशिरंजन को 19 हजार रुपये प्रति माह किराये पर दे रखा है। शशिरंजन चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी में सेल्स मैनेजर है। उसने स्वरूपनगर स्थित पार्लर में काम करने वाली मूलरूप से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी निवासी रेशमा से वर्ष 2014 में मंदिर में प्रेम विवाह किया था।
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इसी कमरे में की गई दोनों बेटियों की हत्या
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कक्षा पांच में पढ़ती थीं दोनों बेटियां
दोनों के जुड़वां बेटियों के अलावा बेटा रुद्रव उर्फ गन्नू (6) है। दोनों बेटियां कक्षा पांच में पढ़ती थीं। रविवार तड़के 4:32 बजे पुलिस कंट्रोल रूम पर शशिरंजन ने फोन कर जुड़वां बेटियों की हत्या करने की सूचना दी।
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सीसीटीवी में कैद हुई वारदात
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खून से सना चापड़ और हथौड़ा बरामद
पुलिस मौके पर पहुंची तो कमरे में हत्यारोपी पिता फर्श पर शवों के पास बैठा मिला। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने शवों के पास से खून से सना चापड़ और हथौड़ा बरामद किया है। पुलिस ने बेटियों की हत्या से अनजान दूसरे कमरे में सो रही मां को जगाकर वारदात की जानकारी दी। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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बिलखती मां को संभालती महिला पुलिसकर्मी
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मनोरोगी ही कर सकता है ऐसी दरिंदगी
कानपु के किदवईनगर में पिता के दो बेटियों के हत्या के प्रकरण को मनोरोग विशेषज्ञ विक्षिप्तता का लक्षण मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर कोई ऐसा वीभत्स कार्य करता है तो तय है कि किसी मनोरोग से ग्रस्त है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी का कहना है कि वैसे बिना केस के अध्ययन किए कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन ऐसे लक्षण सीजोफ्रेनिया के रोगी में आते हैं।
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कमरे में पड़े बच्चों के टेडी बियर
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विशेषज्ञ बोले... सीजोफ्रेनिया में रोगी को आते हैं कमांडिंग हैल्यूसिनेशन
डॉ. चौधरी का कहना है कि सीजोफ्रेनिया में रोगी को कमांडिंग हैल्यूसिनेशन आते हैं। इसमें रोगी को लगता है कि उसे कोई आदेश दे रहा है कि यह कार्य करो और वह करने लगता है। हैल्यूसिनेशन थमने पर वह भी कुछ देर के लिए शांत हो सकता है लेकिन जैसे ही कमांड दोबारा शुरू होगा, वह फिर वही काम करने लगेगा। इसके अलावा मैनिएक व्यक्ति भी जुनून में आकर किसी की हत्या कर सकता है।
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कमरे में लगा कैमरा
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सीजोफ्रेनिया की स्थिति में व्यक्ति को कुछ दिख भी सकता है। यह उसका भ्रम होता है। डिप्रेशन विद साइकोसिस में भी कोई शख्स ऐसी ही हरकत कर सकता है। इसमें व्यक्ति में निराशा भर जाती है। नकारात्मकता आती है। वह सोचता है कि उसके बाद उसके प्रियजनों का क्या होगा, इस अंदेशे में वह उनकी जान ले सकता है और खुद भी जान देने का प्रयास कर सकता है। हर केस में अलग-अलग स्थिति रहती है।
रिद्धी और सिद्धी की फाइल फोटो
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केस के पूरे अध्ययन और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है। मस्तिष्क में न्यूरो केमिकल का बैलेंस बिगड़ने के बाद तरह-तरह के लक्षण आने लगते हैं लेकिन इनके बदले व्यवहार पर नजर रखने से बदलाव का अंदाजा लग सकता है। ऐसे लक्षण पर तुरंत काउंसलिंग और इलाज की जरूरत होती है। इलाज मिल जाने पर रोगी किसी घटना को अंजाम देने से बच जाता है।