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Kanpur Encounter: पुलिस ने विकास दुबे के मामा व चचेरे भाई को मार गिराया था, शवों को लेने तक नहीं आए परिजन

Sun, 05 Jul 2020 09:11 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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पुलिस एनकाउंटर में मारे गए बदमाश - फोटो : amar ujala
मुठभेड़ में मारे गए बदमाश प्रेम प्रकाश पांडेय उर्फ प्रेम कुमार व अतुल कुमार दुबे के शव का पंचनामा भरने को गांव में पुलिस को कोई नहीं मिला। इस पर आसपास के गांवों से पांच चौकीदारों को बुलाकर पंचनामा भरा गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। शनिवार सुबह दो डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के साथ दोनों के शव का पोस्टमार्टम किया।


 
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इसी रास्ते से भागे थे बदमाश - फोटो : amar ujala
इसमें प्रेम प्रकाश को तीन व अतुल को नौ गोलियां (गले और कमर) लगने की पुष्टि हुई। सारी गोलियां आरपार थीं। अधिक रक्तस्राव से मौत की पुष्टि हुई है। बिकरू गांव में गुरुवार देर रात मुठभेड़ में सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों के शहीद होने के बाद पुलिस की टीमों ने बदमाशों की धरपकड़ के लिए कांबिंग शुरू की थी।

 
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मौके पर जांच करती फोरेंसिक टीम - फोटो : amar ujala
पड़ोस के गांव कांशीराम नवादा स्थित मानसिला माता मंदिर में छीपे विकास दुबे के  चचेरे भाई अतुल कुमार व मामा प्रेम कुमार को पुलिस की गोलियां लगीं। सीएचसी बिल्हौर में दोनों को मृत घोषित कर दिया। पंचनामा भरने के लिए उनके  परिजनों और रिश्तेदार तक नहीं आए।

 

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मुठभेड़ में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद - फोटो : amar ujala
इसके बाद चौकीदारों को बुलाकर पंचनामे की प्रक्रिया पूरी की गई। शनिवार सुबह डॉ. राहुल वर्मा व डॉ. जेएन द्विवेदी ने शवों का पोस्टमार्टम किया। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। परिजनों के पोस्टमार्टम हाउस न पहुंचने पर सीओ स्वरूपनगर अजीत सिंह चौहान ने शवों को बिल्हौर थाना प्रभारी के सुपुर्द किया।

 
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कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
पूरी रात कर्मचारियों को कराया इंतजार 
बिल्हौर पुलिस ने शुक्रवार रात करीब 10 बजे सीओ स्वरूपनगर को कॉल कर शवों का पोस्टमार्टम कराने की बात कही। इस बाबत उन्होंने पोस्टमार्टम प्रभारी नवनीत चौधरी और सीएमओ को अवगत कराया। देर रात शवों का पोस्टमार्टम होना था, लेकिन कागजात नहीं पहुंचे। डॉक्टर और कर्मी इंतजार करते रहे। शनिवार सुबह करीब पांच बजे पुलिसकर्मी कागज लेकर पहुंचे। इस पर मौजूद कर्मचारी बिफर पड़े। उनका कहना था कि अगर पोस्टमार्टम सुबह ही होनी था तो पूरी रात इंतजार क्यों कराया गया।
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