कानपुर में शेयर कारोबारी राहुल गुप्ता की पत्नी एकता गुप्ता का कंकाल जिस ऑफिसर्स क्लब से मिला है, उसमें कुल चार कमरे हैं। इनमें तीन कमरों में बिलियर्ड्स, टेबिल टेनिस, बैडमिंटन कोर्ट है जबकि चौथे कमरे में जिम का सामान है। टर्फ फ्लोर बनी हुई है। ऑफिसर्स क्लब में कोई भी केयर टेकर नहीं है बल्कि एक माली ही पूरे परिसर की देखरेख करता है। क्लब की एक चाभी कैंपस में रहती थी जबकि दूसरी विमल के पास। ये इसलिए संभव हुआ क्योंकि शहर में पूर्व में तैनात रहे एक डीएम ने उसे एक्सरसाइज कराने के लिए बुलाना शुरू कर दिया। फिर धीरे-धीरे उसका दखल और प्रभाव बढ़ता चला गया और वह डीएम कंपाउंड में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गया।
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पति राहुल(दायं) व अन्य
- फोटो : अमर उजाला
जिम ट्रेनर विमल को लेकर राहुल का दावा
जिम ट्रेनर विमल का रुतबा इतना हो गया कि वह कभी भी परिसर में बेरोकटोक आ जा सकता था। एकता के पति राहुल गुप्ता का आरोप है कि विमल आए दिन नई लड़कियों के साथ वहां आता-जाता था। दोस्तों को बुलाकर पार्टी भी करता था, लेकिन अफसरों से नजदीकी होने की वजह से उससे कोई सवाल-जवाब नहीं करता था।
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,ekta gupta murder
- फोटो : amar ujala
इन सुलगते सवालों का जवाब नहीं मिल पाया
-परिसर में प्रवेश के तीन गेट हैं, विमल किस गेट से अंदर गया?
-अगर मेन गेट से भीतर गया तो फुटेज क्यों नहीं देखे गए?
-ऐसा क्या था, जिसकी वजह से विमल को कोई रोकता नहीं था?
- विमल के पास ऑफिसर्स क्लब की चाभी क्यों रहती थी?
-आखिर किसे बचाने के लिए वारदात स्थल बदला जा रहा है?
-क्या विमल के साथ परिसर में रहने या काम करने वाला कोई शामिल है?
- कुछ रहस्य ऐसे, जिसकी जांच में पुलिस आगे क्यों नहीं बढ़ रही है?
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kanpur murder
- फोटो : अमर उजाला
विमल होटलों में धोता रहा बर्तन, पुलिस कई जिम में तलाशती रही
पेशे से जिम ट्रेनर होने की वजह से जब विमल फरार हुआ तो पुलिस फोटो लेकर उसे देशभर के जिम में तलाशती रही। हालांकि पूछताछ में पता चला कि वह किसी शातिर अपराधी की तरह अपनी पहचान छुपाते हुए करीब चार महीने तक शहर दर शहर घूमता रहा और पुलिस से बचने के लिए मोबाइल बंद किए रहा। इस दौरान उसने लुधियाना और दिल्ली के होटलों में वेटर के तौर पर काम किया। साथ ही इस दौरान मृत पिता के बैंक खाते से बीस हजार रुपये निकालकर अपना खर्च चलाता रहा। हालांकि पुलिस ने उस खाते को फ्रीज करा दिया। खाते में करीब आठ लाख रुपये मिले हैं। पुलिस दो साल का स्टेटमेंट निकलवा रही है ताकि यह पता चल सके कि यह रकम कहां से आई।
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kanpur murder case
- फोटो : अमर उजाला
बहन को कॉल करने की गलती कर पुलिस की गिरफ्त में आ गया विमल
कहते हैं कि अपराधी कितना भी शातिर हो, वह कुछ न कुछ गलती जरूर कर बैठता है। कुछ ऐसा ही हुआ विमल के साथ। हत्या के बाद चार महीने तक फोन बंद रखकर फरारी काटते रहे विमल ने अपनी बहन को फोन किया और उसी की वजह से पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दरअसल, गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले से पुलिस लगातार विमल की बहन से पूछताछ कर रही थी। इसी दौरान एक दिन विमल ने बहन को एक मोबाइल नंबर से कॉल कर दिया। उसी कॉल पर बात करने के दौरान ही पुलिस को बहन के जरिये विमल की सटीक लोकेशन मिल गई और पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। हालांकि गिरफ्तारी के दौरान भागने की कोशिश में विमल ने तीन सब इंस्पेक्टरों के साथ गुत्थम गुत्था भी हुआ। हालांकि फोर्स पहुंचने के बाद उसे दबोच लिया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
सात दिन का मांगा कस्टडी रिमांड
विवेचक ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मंगलवार को विमल का सात दिन का कस्टडी रिमांड मांगा है। पुलिस का मानना है कि कम से कम पांच दिन का कस्टडी रिमांड मिल सकता है। समय बर्बाद न हो इसके लिए तमाम पुलिस कर्मियों को सवाल तैयार करने के लिए लगाया गया है। पूरी विवेचना के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तैयार किए जाएंगे। साथ ही पुलिस पूछताछ की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी करेगी। इसमें अब अनसुलझे सवालों को शामिल किया जाएगा।
फरारी में मदद करने वाले बन सकते हैं सह आरोपी
एकता के लापता होने से लेकर उसका कंकाल मिलने तक के दौरान कई लोगों ने विमल की मदद की है। अब पुलिस इन सबको सह आरोपी बनाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार विमल की बहन पुलिस के रडार पर है। विमल फरार होने के दौरान महोबा निवासी एक रिश्तेदार के घर गया और वहां से लगातार बहन के संपर्क में रहा। वहीं, भांजे से बैग मंगवाया और उसे लेकर रावतपुर तक गया जहां उसे दस रुपये देकर घर जाने के लिए छोड़कर वह फिर ऑफिसर्स क्लब समेत कई अन्य जगह गया।