कानपुर के किडनी कांड में एक और नया खुलासा हुआ है। डॉ. रोहित किसी और की आईडी पर पांच मोबाइल नंबर चला रहा था। दूसरे की आईडी पर नंबर लिए थे। एनसीआर से कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। अली और डॉ. अफजल के मोबाइल बंद हैं।
कानपुर शहर में हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले के आरोपी डॉ. रोहित के पांच मोबाइल नंबर किसी और की आईडी पर चलते मिले। यह जानकारी पुलिस और क्राइम ब्रांच को मिली है। उन दस्तावेज के सहारे कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनसे डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, मुदस्सर अली सिद्दीकी समेत अन्य के बारे में पूछताछ हुई है।
कमिश्नरी पुलिस ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के खेल को पकड़ा है। अब तक आहूजा हॉस्पिटल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव, राजेश तोमर, परवेज सैफी को जेल भेजा गया है।
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आरोपी शिवम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस को डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, मुदस्सर अली, डॉ. वैभव, डॉ. अनुराग, नवीन पांडेय, लखनऊ के एक लैब टेक्नीशियन और तीन डॉक्टरों की तलाश है।
मामले में कई और स्टाफ के शामिल होने की आशंका है लेकिन फोकस डॉ. रोहित, डॉ. अफजल और मुदस्सर अली सिद्दीकी पर है।
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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार
- फोटो : पुलिस
तीनों के खिलाफ गुरुवार को 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। इससे पूर्व तीनों व अन्य आरोपियों को लुक आउट नोटिस जारी किया गया था। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक तीनों इनामी आरोपी का नाम पूरे खेल में शामिल है। यह पूर्व में भी कई बार शहर आ चुके हैं।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को अली और परवेज सैफी लेकर आए थे। शिवम अग्रवाल और परवेज सैफी ने पुलिस को कई अहम जानकारियां दी हैं। इससे पता चल रहा है कि रोहित और डॉ. अफजल एनसीआर के अस्पतालों में आने वाले किडनी मरीजों को कानपुर भेज रहे थे। उनको वहां पर पैकेज और अन्य जानकारियां दी जाती थी जिसके बाद डोनर की व्यवस्था होती थी।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शहर में नर्सिंगहोम और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी शिवम अग्रवाल की थी। डॉ. रोहित, डॉ. अफजल और अली की जानकारी जुटाई जा रही है। डॉ. रोहित के कुछ मोबाइल नंबर फर्जी दस्तावेजों से लिए गए थे। वह अधिकतर व्हाट्सएप कॉलिंग करता था। इसकी और जानकारी जुटाई जा रही है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रात भर रहते थे सक्रिय
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक किडनी ट्रांसप्लांट के आरोपी रातभर सक्रिय रहते थे। उनके सोशल मीडिया अकाउंट औसतन साढ़े तीन से चार बजे तक ऑनलाइन रहते थे। यह वही समय था जब नर्सिंगहोम में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया जाता था।
पुलिस को आहूजा हॉस्पिटल और मेडिलाइफ हॉस्पिटल के स्टाफ से पहले ही जानकारी मिली थी कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए टीमें देर रात सर्जरी करती थीं। ऑपरेशन के तुरंत बाद ही डोनर और रिसीवर को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया जाता था।