अपहृत संजीत अब दुनिया में नहीं है। इसकी जानकारी गुरुवार देर रात घर पहुंचकर पुलिस ने दी तो परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटे की राह तक रहे पिता बदहवास होकर गिर गए। मां और बहन रात भर रोती रहीं।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
मौके पर पहुंचने वालों की भी आंखें नम हो गईं। हर जुबान पर यही सुनने को मिला कि लापरवाह पुलिस ने बूढ़े माता-पिता को जिंदगी भर का गम दे दिया। बहन रुचि संजीत को याद कर सभी से पूछती रही कि ‘हाय मेरा भाई कहां चला गया, अब मैं रक्षाबंधन पर किसको राखी बांधूंगी’।
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‘हत्यारों ने हमारा इकलौता सहारा छीन लिया। मेरे भाई से कोई एक बार मिलवा दे, चाहे सब कुछ ले लो...। मां कुसुमा देवी आने-जाने वालों से कहती रहीं कि 28 साल मैंने अपने लाल को कैसे संभाल कर रखा और हत्यारों ने मेरी गोद सूनी कर दी।
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अब इस गम के साथ कैसे जी पाएंगे...। खाकी वर्दी देखते ही मां उनसे कहने लगतीं ‘बेटा नहीं दिला सके तो कम से कम उसकी डेडबॉडी ही दिखला दो...। मां-बेटी हाल देखते नहीं बन रहा था। हर व्यक्ति पुलिस की लापरवाही को कोस रहा था।
बता दें कि कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।