संजीत अपहरण कांड में जांच के दौरान अगर किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता पाई गई तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यह आश्वासन सोमवार शाम संजीत के परिजनों से उनके बर्रा स्थित घर पर मुलाकात करने पहुंचे नवागंतुक डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने दिया।
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kanpur kidnapping case
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उन्होंने करीब आधे घंटे तक संजीत के पिता, मां व बहन के साथ बैठ कर पूरे मामले को सुना। रोते-रोते परिजनों ने उनको तत्कालीन एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता, सीओ मनोज गुप्ता, इंस्पेक्टर रणजीत राय और तत्कालीन चौकी प्रभारी राजेश कुमार के किए गए अभद्र व्यवहार से भी अवगत कराया।
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शव की तलाश में जुटी पुलिस
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डीआईजी ने मीडिया के सवालों को जबाव देते हुए बताया कि नए सिरे से और सभी एंगलों से जांच की जाएगी। इस कांड से जुड़े वीडियो फुटेज, कॉल डिटेल और वायस रिकॉर्डिंग की भी दोबारा जांच कराई जाएगी। नाट्य रूपांतरण कराया जाएगा।
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अगर जरूरत पड़ी तो सभी अभियुक्तों को कोर्ट से रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की जाएगी। कंडम कार से संजीत के अपहरण के सवाल पर बताया कि कार की तकनीकी जांच कराई जाएगी। इससे साफ हो जाएगा कि कार चलने की हालत में थी या नहीं। अपहर्ताओं के किराये के मकान की फॉरेंसिक जांच होगी।
बता दें कि कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।