कानपुर के संजीत अपहरण कांड में कन्नौज में रहने वाले परिवार के बाबा इंद्रजीत ने बताया कि संजीत की फिरौती को रकम जुटाने उसके पिता चमन गांव गए थे। इस पर दोनों छोटे भाइयों ने जैसे-तैसे व्यवस्था कर तीन लाख रुपये दिए थे। मामले में पोते की मौत की खबर सुन कर 75 वर्षीय इंद्रजीत की आंखें भर आईं।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा कि बऊआ जब भी कानपुर से आता था जिद कर अपने साथ खेत ले जाता था। उसे खेत में बहुत अच्छा लगता था। वह खेत में कई लोगों के साथ बैठकर शहर की बातें बताता था। विश्वास नहीं हो रहा वह अब हमारे बीच नहीं है। चचेरी बहन रोली ने बताया कि साल में एक दो बार संजीत भैया गांव आते थे। वह कानपुर से उनके लिए कपड़े, मिठाई, सामान लाते थे। कहा कि भाई के हत्यारों को फांसी मिले, तभी परिवार को इंसाफ मिलेगा। रोली ने कहा कि पुलिस ने तो उनके परिवार को लुटवा दिया, कोई कैसे पुलिस पर भरोसा करें।
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कन्नौज में संजीत के पिता चमन यादव करीब 30 साल पहले पत्नी को लेकर कानपुर के बर्रा-05 में रहने लगे थे। दो भाई शिव सिंह व मानसिंह बर्रा और दो भाई कश्मीर सिंह व सर्वेश सिंह गांव में रहते हैं। चमन कानपुर में पान की दुकान चलाते हैं। उन्होंने इकलौते बेटे संजीत यादव को बेहतर शिक्षा दिलाई, वह लैब टेक्नीशियन था। बारह जून को संजीत के अपहरण की खबर पर कश्मीर और सर्वेश कानपुर चले गए थे।
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30 लाख रुपये फिरौती लेने के बाद भी बदमाशों ने संजीत की हत्या कर दी। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे चचेरी बहन रोली को फोन पर भाई संजीत की हत्या की खबर मिली। ये सुनते ही तीनों बहनें रोली, मोनी और सानू चीख पड़ीं। शोर सुनकर आसपास के लोग घर पहुंचे। कुछ ही देर में पूरे गांव में खबर फैल गई। इससे गांव में सन्नाटा पसर गया। रोते-रोते तीनों बहनें बेहोश हो रही थीं। पड़ोस के लोगों ने उन्हें संभाला। परिवार के साथ गांव के कई लोग कानपुर रवाना हो गए।
जनवरी में गांव आया था संजीत
कन्नौज। उसके पड़ोसी और बचपन के दोस्त बृजेश ने बताया कि संजीत जनवरी में गांव आया था। सर्दियों में रात 11 बजे तक वह आग के पास दोस्तों के साथ बैठा रहता था। गांव में जब भी कोई बीमार होता था, तो संजीत कानपुर के अच्छे अस्पतालों में इलाज कराता था। संजीत की हत्या पुलिस की लापरवाही से हुई है। पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।