संजीत अपहरण और हत्याकांड में पुलिस एक बार फिर अपहर्ताओं के आगे हार गई। संजीदा मामलों में भी पुलिस की देर से जागने वाली आदत संजीत की मौत की वजह बनी। परिजन लगातार मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस हर बार की तरह अपना अलग ‘राग’ अलापती रही।
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Kanpur Kidnapping Case
- फोटो : amar ujala
अपहर्ता बेखौफ होकर परिजनों को फोन पर धमकाते रहे, और पुलिस तमाशबीन बनी रही। यह कोई पहला मामला नहीं जब पुलिस की लापरवाही किसी के जीवन पर भारी पड़ी।पहले भी अपहरण की कई वारदातों में पुलिसिया लापरवाही से कई घरों के ‘चिराग’ बुझ चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस के छोटे-बड़े अधिकारियों ने कोई सीख नहीं ली।
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पुल से पैसे फिंकवाने का पुराना पैंतरा
पुलिस केएक अधिकारी ने बताया कि अपहरण के मामले में बदमाश अक्सर फिरौती के लिए ऐसी जगह बुलाते हैं, जहां उनके पकड़े जाने के चांस न के बराबर हों। पूर्व की कई वारदातों में यह बात सामने आ चुकी है। संजीत के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ।
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kanpur kidnapping case
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फिरौती की रकम के लिए अपहर्ता संजीत के पिता को उन्नाव, चकेरी, नौबस्ता के चक्कर लगवाते रहे, और फिर गुजैनी पुल पर बुलाकर पैसे नीचे फिंकवा दिए। पिता का आरोप है कि उन्होंने पुलिस के कहने पर ही पैसे नीचे फेंके थे। लेकिन जब तक पुलिस नीचे पहुंची अपहर्ता पैसे लेकर फरार हो गए। अगर समय रहते पुलिस गुजैनी पुल के नीचे जाल बिछा देती तो आरोपी 13 जुलाई को ही पकड़े जाते।
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अपहरण के मामलों में पुलिस करती खानापूरी
अपहरण के अधिकांश मामलों में फिरौती के लिए फोन आने के बाद भी पुलिस शुरुआती तौर पर इसे फर्जी ही मानती है। युवतियों के गायब होने पर पुलिस अक्सर परिजनों से यही कहती है कि ‘किसी के साथ भाग गई होगी’। वहीं, युवकों के मामलों में ‘परेशान न हो, घूम फिरकर आ जाएगा’, कहकर कई दिनों तक पीड़ितों को टरकाती रहती है।
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ऐसे में जब तक पुलिस को इस बात का एहसास होता है कि अपहरण सच में हुआ है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। संजीत के मामले में भी पुलिस पहले गुमशुदगी दर्ज कर हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। परिजनों ने जब अपहरण व फिरौती को लेकर फोन आने की जानकारी दी, तब भी सच जानने का प्रयास नहीं किया। और कोई न कोई बहानेबाजी कर पुलिस अपनी ड्यूटी से बचती रही।
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इन मामलों में पुलिसिया लापरवाही बनी मौत का कारण
1. वर्ष 2009 में किदवई नगर निवासी ट्रांसपोर्टर पवन महेश्वरी के इकलौते बेटे करन (14) का अपहरण हो गया था। पुलिस ने तीन दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू की। पुलिस जब करन को नहीं खोज पाई तो परिजनों के साथ तीन लाख फिरौती देने का प्लान तैयार किया। अपहर्ताओं ने झकरकटी पुल से पैसे नीचे फिंकवाए। पुलिस ने पैसे लेने आए आरोपिरयों को तो पकड़ लिया, लेकिन करन की हत्या हो गई।
2. 2009 में ही तत्कालीन फतेहपुर डीएम कार्यालय के पेशकार प्रदीप बाजपेई के इकलौते बेटे शिवम बाजपेई (15) का 17 अगस्त को नौबस्ता में उसकी नानी के घर के पास से अपहरण हो गया। पुलिस के नींद से जगते ही अपहर्ताओं ने उसकी हत्या कर दी। बाद में पुलिस ने इस वारदात से जुड़े सभी लोगों को गिरफ्तार किया।
3. 2014 में मूलरूप से फतेहपुर निवासी अभय (17) का लिफ्ट देने के बहाने चकेरी के पास से अपहरण हो गया था। इस मामले में भी पुलिस को जगने में दो दिन लगे। इस बीच बदमाशों ने छात्र की हत्या कर दी। इसके बाद भी फिरौती की रकम मांगते रहे। बाद में पुलिस ने इन्हें फिरौती लेते वक्त गिरफ्तार किया।
4. 2016 में नौबस्ता में बैंक मैनेजर धर्मपाल सिंह के इकलौते बेटे आशुतोष (9) का अपहरण हो गया। अपहर्ताओं ने 10 लाख की फिरौती मांगी। पुलिस उनकी तलाश में जुटी, लेकिन नौ दिन बाद आशुतोष की जली लाश मिली। बाद में पुलिस ने सभी अपहर्ताओं को गिरफ्तार किया।