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शव के साथ डेढ़ साल: मुर्दे के इलाज में खर्च कर डाले 30 लाख रुपये, मां बोली- बेटे की धड़कन और दिमाग चल रहा था

Sun, 25 Sep 2022 06:22 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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income tax officer dead body - फोटो : अमर उजाला
मां की ममता, पिता की आस और पत्नी का प्यार इस कदर अंधविश्वास में बदल गया कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि विमलेश (35) अब इस दुनिया में नहीं रहा। इसी अंधविश्वास का फायदा उठाया दो निजी अस्पतालों और एक झोलाछाप ने। डेढ़ साल के दौरान इन लोगों ने मुर्दे के इलाज के नाम पर घर वालों के 30 लाख रुपये खर्च करा डाले। इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाते रहे और रुपये वसूलते रहे।

विमलेश के पिता रामऔतार ने बताया कि 22 अप्रैल के बाद से करीब डेढ़ माह तक शहर से लेकर पीजीआई तक के डॉक्टरों से संपर्क किया। इस दौरान कई प्रतिष्ठित और निजी अस्पताल में विमलेश को लेकर गए। कहीं कोरोना तो कहीं हॉस्पिटल में जगह न होने का हवाला देकर अस्पताल के भीतर ही नहीं घुसने दिया गया।

इस दौरान कल्याणपुर और बर्रा के निजी अस्पतालों ने बाकायदा विमलेश को भर्ती किया और इलाज भी किया। मोटी रकम वसूलने के बाद छुट्टी कर दी। तब परिवार वालों ने झोलाछाप से संपर्क किया। वह घर आकर विमलेश का इलाज करने लगा।
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income tax officer dead body - फोटो : अमर उजाला
चार दिन में खर्च हुए नौ लाख रुपये
भाई दिनेश ने बताया कि पिछले साल 19 अप्रैल को उन्होंने सबसे पहले विमलेश को बिरहाना रोड स्थित मोती हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। 22 अप्रैल तड़के करीब चार बजे अस्पताल प्रशासन ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस बीच अस्पताल प्रबंधन ने चार दिन में उनसे नौ लाख रुपये जमा कराए थे। रुपये जमा करने के बाद विमलेश के शव के साथ मृत्यु प्रमाणपत्र दिया था। अंतिम यात्रा के दौरान विमलेश की धड़कन चलने का एहसास हुआ, तभी से उसका इलाज कराते रहे।
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income tax officer dead body - फोटो : अमर उजाला
ऑक्सीजन में खर्च कर डाले चार लाख रुपये
भाई मनोज का दावा है कि झोलाछाप के कहने पर वह कई बार ऑक्सीजन सिलिंडर घर लेकर आए थे। यहां तक कोरोना काल के समय एक लाख रुपये देकर एक ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदा था। सिलिंडर में करीब चार लाख रुपये खर्च हुए थे। सात अक्तूबर के बाद से विमलेश को सिलिंडर नहीं लगा।

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income tax officer dead body - फोटो : अमर उजाला
रेमडेसिविर इंजेक्शन भी लगाया 
परिजनों का दावा है कि झोलाछाप ने भी घर में इलाज करने के नाम पर उनसे लाखों रुपये वसूले। यहां तक कि कई रेमडेसिविर इंजेक्शन भी खरीदकर लाए। झोलाछाप इन इंजेक्शन को लगाने का दावा करता रहा। छह माह इलाज के बाद झोलाछाप ने विमलेश की नस न मिलने का दावा करते हुए इलाज से इनकार कर दिया था। 
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income tax officer dead body - फोटो : अमर उजाला
‘धड़कन और दिमाग चल रहा था’
मां का कहना था कि वह पहले बेटे को नहलाती थी, लेकिन बाद में सिर्फ गंगाजल से पोछने लगी थी। बेटे के साथ-साथ कमरे में साफ सफाई रखती थी। उनके बेटे की धड़कन और दिमाग चल रहा था। उसके सिर के एक बाल भी नहीं टूटे थे। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनका बेटा नहीं रहा। 
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