फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कानपुर एनकाउंटर: ग्रामीण बोले, 18 गांवों की 200 बीघा जमीन पर विकास का कब्जा, कोई विरोध करता तो मारा जाता

Wed, 15 Jul 2020 02:07 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 6
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
दहशतगर्द विकास दुबे ने इलाके के 18 गांवों की करीब 200 बीघा जमीन कब्जा कर रखी थी। फसल पर भी वो हर सीजन में किसानों से मोटी रकम वसूलता था। बिकरू व उसके आसपास के ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन के अलावा एसआईटी व न्यायिक आयोग को बताया कि विकास की दहशत के चलते वो लोग कभी भी अपने मन की फसल नहीं बोते थे। जो विकास कहता था वो ही करना पड़ता था। उसने जमीन या तो जबरन लिखवा ली या सीधे कब्जा कर लिया।

 
विज्ञापन

2 of 6
kanpur encounter SIT - फोटो : अमर उजाला
अगर विरोध करता तो मारा जाता
गांव निवासी जमालुद्दीन, इम्तियाज, गफूर जैसे आधा दर्जन लोगों ने न्यायिक आयोग के सामने बताया कि विकास ने किसी दो तो किसी की तीन बीघा या इससे अधिक जमीन कब्जा कर ली थी। उसके गुर्गे खेती करवाते थे या फिर बेच देते थे।

विज्ञापन

3 of 6
kanpur encounter SIT - फोटो : अमर उजाला
आज तक एक पैसा नहीं दिया
गांव निवासी विश्वनाथ की चक्की है। उन्होंने बताया कि विकास के गुर्गे हर महीने कई कुंतल आटा उनकी चक्की से ले जाते थे। आज तक एक भी पैसा नहीं दिया। एक दो बार जब पैसे मांगे तो विकास के गुर्गे अमर दुबे व अतुल दुबे ने जान से मारने की धमकी दी।

 

4 of 6
kanpur encounter SIT - फोटो : अमर उजाला
कानून व्यवस्था पर सवाल
विकास दुबे के मारे जाने के बाद जिस तरह से ग्रामीण उसके जुर्म की दास्तान बयां कर रहे हैं, उससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। कानपुर शहर से सटे गांव में तानाशाह दहशतगर्द जुर्म पर जुर्म कर रहा था और जिम्मेदारों को भनक नहीं थी।

 
विज्ञापन

5 of 6
बिकरू गांव में जांच करने पहुंची एसआईटी की टीम - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि सोमवार को न्यायिक जांच के लिए बिकरू गांव पहुंचे रिटायर्ड जस्टिस शशिकांत अग्रवाल ने गांव के ग्रामीणों से बातचीत की। बिकरू गांव के जमालुद्दीन ने बताया कि वह कई वर्षों से ग्राम पंचायत की दो बीघा जमीन पर खेतीबाड़ी कर अपने परिवार की गुजर बसर करते थे। लेकिन जब यह बात विकास दुबे को मालूम हुई तो उसने कुछ माह पहले ही उनकी भूमि छीनकर अपने एक साथी को दे दी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
बिकरू गांव में जांच करने पहुंची एसआईटी की टीम - फोटो : अमर उजाला
रज्जाक, गफूर ने बताया कि गांव में पंचायत चुनाव में मनमुताबिक वोट और पर्चा भरने पर पंडित (विकास दुबे) के गुस्से का सामना करना पड़ता था। इम्तियाज ने भी विकास पंडित के साथ चलने वाले कई गुर्गों का नाम लेते हुए बात-बात पर बंदूक, रायफल तान देने की बात भी बताई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें