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कानपुर एनकाउंटर: विकास लोगों से कहता, पंडितजी के गांव में सेना ही घुस सकती है, परिंदा भी पर नहीं मार सकता

Sat, 04 Jul 2020 02:56 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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विकास दुबे - फोटो : amar ujala
कुख्यात अपराधी विकास दुबे ने अपराध के सहारे यूपी सहित आसपास के राज्यों में साम्राज्य खड़ा कर रखा है। विकास का गांव में सिक्योरिटी से लैस किले की तरह मकान है। जेल की तरह दीवारें हैं। इन पर कांटेदार तारों से घेराव है। व्यवस्था ऐसी कि परिंदा भी पर मारे तो विकास को इसकी खबर हो जाए।

 
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विकास दुबे ने खेला खूनी खेल - फोटो : amar ujala
दंभ में चूर विकास लोगों से कहता रहा है कि पंडितजी के गांव में सिर्फ सेना ही घुस सकती है और यहां आने की हिम्मत कोई नहीं करेगा।  विकास ने कानपुर के अलावा कई अन्य शहरों में करोड़ों की जमीनें कब्जा की हैं। अरबों की संपत्ति बनाई है। गांव के मकान में 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। दीवारों की ऊंचाई तीस से चालीस फीट है।

 
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सीओ सहित आठ पुलिस वालों को गोलियों से भून डाला - फोटो : amar ujala
इन पर कंटीले तारों की घेरेबंदी से यहां किसी का दाखिल होना आसान नहीं। अगर कोई दाखिल हो भी जाए तो उसका पकड़ा जाना तय है। उसके पास लग्जरी कारें हैं। घर में लाखों के फर्नीचर व लग्जरी इलेक्ट्रॉनिक के सामान हैं। कुल मिलाकर वह गांव में लग्जरी लाइफ जीता आया है और पैसों के दम पर लोगों को अर्दब में ले रखा है। डर की वजह से ग्रामीण उसके साथ रहे हैं।

 

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घटना के बाद हर ओर खून और हथियार मिले - फोटो : amar ujala
वोट बैंक के लिए नेता टेकते आए माथा
बदमाशी के दम पर विकास ने आसपास के दर्जनों गांवों में अपना दबदबा बना रखा है। उसका कहा कोई नहीं टालता। नेता भी उसके प्रभाव में हैं। खासकर वोट बैंक के लिए। जो भी सांसदी या विधायकी का चुनाव लड़ता है वह विकास से संपर्क जरूर करता। उसके साथ से प्रभाव वाले गांवों के वोट मिलते हैं। उसकी राजनीतिक पैठ समय के साथ बढ़ती ही रही।  

 
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छावनी में तब्दील हुआ गांव - फोटो : amar ujala
पुलिस से खौफ नहीं
60 मुकदमे और कई बार जेल जाने के बाद भी विकास के भीतर पुलिस का कभी कोई डर नहीं रहा। जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया, उससे भी यह साबित होता है कि खाकी का उसको खौफ नहीं था। इसीलिए वह लोगों से कहता रहता कि बिकरू में अगर कोई घुस सकता है तो सिर्फ सेना। पुलिस, पीएसी की हिम्मत नहीं कि वे गांव में दाखिल हो जाएं। इससे उसकी बेअंदाजी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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