जय बाजपेई पांच भाइयों में तीसरे नंबर का है लेकिन संपत्ति के मामले में वह नंबर वन है। इस तथ्य का खुलासा जय के भाई रजय ने आईजी आलोक सिंह द्वारा कन्नौज के तत्कालीन एएसपी केसी गोस्वामी को सौंपी जांच में पूछताछ के दौरान 2017 में किया था। बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के सहयोगी जय के भाई रजय का रसूख भी कुछ कम नहीं था।
विज्ञापन
2 of 7
जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
सपा के सक्रिय सदस्य और सपा शासन में एसपीओ रहे रजय ने पुलिस के सवालों के बड़ी बेबाकी से जवाब दिए थे। रजय ने बताया था कि जय के नाम ब्रह्मनगर में दो मकान हैं, जबकि उसकी पत्नी श्वेता के नाम पर बी ब्लॉक पनकी व ब्रह्मनगर में एक-एक मकान है। बाकी चारों भाइयों या उनकी पत्नियों के नाम कोई मकान नहीं है।
विज्ञापन
3 of 7
Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
जय के नाम पर इंडिगो कार है, जबकि बाकी भाइयों के नाम दोपहिया वाहन ही हैं। जय के पास रिवॉल्वर का लाइसेंस और पासपोर्ट है। जय के एक चार मंजिला मकान में पुलिसवाले किराये पर रहते थे। इनमें तत्कालीन परमट चौकी प्रभारी राजपाल सिंह व पांच महिला कांस्टेबल भी थीं। जय ने कभी किराये की कोई रसीद नहीं काटी। रजय ने बताया था कि वह सपा में 15-16 साल से नेतागीरी कर रहा है और जय के काम देखता है।
4 of 7
Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
बड़े भाई अजय की बैट्री व कार एसेसरीज की दुकान है। छोटा भाई राहुल मकानों व पुरानी गाड़ियों को बिकवाने का काम करता है जबकि शोभित एलएलबी का छात्र है। जांच के दौरान कन्नौज एएसपी ने शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया, विपक्षी जय-रजय व उसके परिजनों, आरोपी पुलिसकर्मियों सहित कई लोगों के बयान लेने के बाद 21 मार्च 2018 को दी 29 पन्नों की जांच रिपोर्ट में सभी तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख किया था।
विज्ञापन
5 of 7
जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
जांच रिपोर्ट में उन्होंने मुकदमे दर्ज होने के बावजूद जय के नाम से बजरिया थाने से रिवॉल्वर का लाइसेंस तथा नजीराबाद थाने से पासपोर्ट बनने पर दोनों थाना प्रभारी, संबंधित चौकी प्रभारियों, डीसीआरबी प्रभारी व स्थानीय अभिसूचना इकाई की भूमिका को संदिग्ध मानकर विस्तृत जांच की संस्तुति की थी।
विज्ञापन
6 of 7
जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
जांच शुरू हुई पर मुकाम तक नहीं पहुंची
एक शिकायतकर्ता ने 2017 में तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि जय बाजपेई ने कुछ सालों में अकूत संपत्ति बना ली है। नजीराबाद, बजरिया, चौबेपुर, सीसामऊ समेत कई थानों में मुकदमे दर्ज होने के बाद भी पासपोर्ट व शस्त्र लाइसेंस बन गए। इन सभी मामलों की सीबीआई, ईडी व आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से जांच कराई जानी चाहिए।
तब कमिश्नर ने तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह को जांच के आदेश दिए तो 29 अगस्त 2017 को तत्कालीन एसीएम पीसी श्रीवास्तव व सीओ नजीराबाद नवीन कुमार सिंह ने जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें आयकर विभाग से गहन जांच की संस्तुति भी की थी, लेकिन अफसर बदलते ही रिपोर्ट दबा दी गई।