विकास दुबे के बिकरू गांव के घर में बिजली चोरी का मामला नहीं बल्कि लोड चोरी का मामला मिला है। घर का कनेक्शन विकास की पत्नी रिचा दुबे के नाम है। एक किलोवाट के कनेक्शन पर तमाम बिजली उपकरण धड़ल्ले से चल रहे थे। हालांकि यूनिट के हिसाब से जो बिल बनता था, उसे नियमित जमा कराया जा रहा था।
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सिर्फ लोड अधिक होना चाहिए था, जिससे हर महीने फिक्स चार्ज की चोरी का मामला बन सकता है। विकास के परिवार के तीन सदस्यों के नाम अलग-अलग कनेक्शन हैं, जिसमें दो कनेक्शन ट्यूबवेल के हैं। एक कनेक्शन विकास दुबे दूसरा उनके पिता के नाम है। एक पर 18 हजार रुपये और दूसरे पर 3200 रुपये बाकी है।
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जेई, एई कर रहे जांच, अधीक्षण अभियंता देंगे रिपोर्ट
विकास दुबे के घर में तीन एसी समेत कई उपकरण थे। इसके बाद भी एक किलोवाट का कनेक्शन होने और कम बिल आने का मामला सामने आया था। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी सौम्या अग्रवाल ने इसकी जांच कानपुर जोन के चीफ इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद से कराने के निर्देश दिए थे। इस मामले की शिवली के एसडीओ सौरभ मिश्रा और जेई ने जाकर जांच की। इसकी रिपोर्ट झींझक के एक्सईएन अभिषेक सिंह के माध्यम से अधीक्षण अभियंता देंगे।
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इस मामले की रिपोर्ट कानपुर देहात के अधीक्षण अभियंता मंगलवार को मिलेगी। प्रथमदृष्टया घर के बिजली कनेक्शन का स्वीकृत लोड मौके पर मिले लोड से कम मिला है। - राजेंद्र प्रसाद, चीफ इंजीनियर, कानपुर जोन, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम
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इससे पहले खुलासा हुआ था कि अवैध तरीके से करोड़ों की संपत्ति जुटाने वाला दहशतगर्द विकास दुबे घर में एक रुपया नहीं रखता था। वारदात के बाद ढहाए गए विकास के घर से पुलिस को फूटी कौड़ी तक नहीं बरामद हुई थी। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि पुलिस की तलाशी फर्द में लिखी है। हालांकि यह बात अलग है कि 29 जून को अमर दुबे की अपने घर से शादी के दौरान विकास ने लाखों रुपये पानी की तरह बहाए थे।
चौबेपुर के बिकरू गांव में दो जुलाई की देर रात विकास दुबे और उसके गुर्गों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर आठ पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। दूसरे दिन पुलिस ने विकास के घर के तीन कमरों, बाथरूम और हॉल को छोड़कर बाकी निर्माण को जेसीबी से ढहा दिया था। तलाशी फर्द के मुताबिक पुलिस टीम ने जब दोनों कमरों की तलाशी ली तो वहां रखीं अलमारियों और उसके लॉकर के ताले और बेड टूटा मिला था। पुलिस को गोपाल सैनी समेत विकास के छह करीबियों के घरों की अलमारियों के भी ताले टूटे मिले थे। जेवर और नकदी समेत अन्य सामान गायब था। ऐसे में ग्रामीणों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए। इस पर ग्रामीणों ने बताया कि वारदात के बाद आरोपियों के घरों पर पुलिस के अलावा कोई और नहीं गया था।