दहशतगर्द विकास दुबे के खूंखार साथी अभी भी फरार हैं। ग्राम प्रधान समेत 10 आरोपी (नामजद) इनमें शामिल हैं। एनकाउंटर की रात ये सभी बिकरू में मौजूद थे और पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसाईं थीं। एसटीएफ और पुलिस की टीमें अब इन आरोपियों की धरपकड़ तेज कर दी है।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
कई टीमें अलग-अलग राज्यों में भी डेरा डाले हुए हैं। वारदात में अब तक दहशतगर्द विकास दुबे, उसका साथी अमर दुबे, प्रभात मिश्रा, चचेरा भाई अतुल, बउआ उर्फ प्रवीण दुबे और उनका मामा प्रेम प्रकाश पांडेय मारा जा चुका है। इसके अलावा एक दर्जन आरोपी जेल भेजे गए हैं।
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अभी भी नामजद आरोपी राजाराम उर्फ प्रेम कुमार, शिव तिवारी, विष्णु पाल यादव, राम सिंह यादव, रामू बाजपेई, गोपाल सैनी, हीरू दुबे, बउन शुक्ला, शिवम दुबे और बाल गोविंद फरार हैं। इसमें राम सिंह यादव, हीरू, शिव तिवारी जैसे आरोपी बहुत ही खूंखार हैं। उस रात इन सभी ने पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारा था। राम सिंह यादव आखिर में चलते चलते टॉर्च लगाकार पुलिसकर्मियों को खोज रहा था। जिसकी भी सांस चलती मिली, उसको उसने गोली मारी।
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- फोटो : amar ujala
बता दें कि कि दो जुलाई की रात को विकास के गांव बिकरू दबिश डालने गई पुलिस की टीम पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ सहित आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर विकास दुबे के पांच साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया।
वहीं यूपी एसटीएफ ने विकास के 12 साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। नौ जुलाई की सुबह उज्जैन से कानपुर लाते समय विकास की कार पलट गई। इस दौरान उसने सिपाही की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की पर पुलिस ने मुठभेड़ में विकास को भी मार गिराया। इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी और जांच आयोग का गठन हुआ है।