पोते की मौत के गम से अभी उबर नहीं पाई थी कि पुलिस ने बेटे को भी अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया। बेटे के साथ यदि कोई अनहोनी हुई तो परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जान दे दूंगी। विकास दुबे ने मेरे परिवार का सत्यानाश करा डाला। यह कहना था बिकरू कांड के बाद मुठभेड़ में मारे गए प्रभात मिश्रा की दादी राजकली (82) का।
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kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
उनका कहना था कि कभी सोचा नहीं था विकास पंडित के पड़ोस में रहने की इतनी बड़ी सजा चुकानी पड़ेगी। राजकली बताती हैं कि पति की असमय मौत हो गई थी। बेटे राजेंद्र और बहू गीता के तमाम पूजापाठ के बाद नाती प्रभात का जन्म हुआ था। उसकी उम्र 16 साल थी। पड़ोसी होने के नाते विकास के घर पर उसका आना-जाना था।
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पुलिस की गिरफ्त में विकास का गुर्गा
- फोटो : अमर उजाला
घटना वाले दिन सभी कमरे में सोए थे। छत पर चढ़कर किस-किस ने गोली चलाई, कुछ नहीं पता। सुबह 8 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की जानकारी हुई। बोलीं, घटना में शामिल होने की बात कहकर पुलिस ने पहले नाती प्रभात को मार डाला। पुलिस अब बेटे राजेंद्र के पीछे पड़ गई है।
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- फोटो : amar ujala
बता दें कि मंगलवार को गिरफ्तार किए 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी शशिकांत पांडे ने प्रभात के साथ उसके पिता राजेंद्र मिश्रा के भी हत्याकांड में शामिल होने की बात पुलिस को बताई है। राजेंद्र घर से फरार हैं। दूसरी ओर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के चचेरे भाई मृतक अतुल दुबे की मां और अमर दुबे की दादी ज्ञानवती (80) भी अपने भाग्य को कोस रही हैं।
उनका कहना था कि एक वर्ष पहले पति सूर्य कुमार की मौत हो गई थी। अब बेटे व नाती की मौत से वह टूट चुकी हैं। कहा कि परिवार होने से विकास के घर से संबंध थे। मेरा बेटा अतुल और नाती अमर कब उसके जाल में फंस गए, कुछ पता नहीं चला।