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ग्राउंड रिपोर्ट: दुर्दांत विकास के गांव बिकरू में पसरा सन्नाटा, जमीदोज मकान, सुनसान गलियां, सहमे लोग और भी बहुत कुछ

Sat, 11 Jul 2020 02:56 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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kanpur encounter news - फोटो : amar ujala
आठ पुलिस कर्मियों के मौत के जिम्मेदार दुर्दांत विकास दुबे का आज अंत हो गया। उसे पुलिस ने मुठभेड़ में उज्जैन से लाते समय कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में मार गिराया। कुछ ही देर में विकास के एनकाउंटर की खबर जंगल में आग की तरह पूरे प्रदेश में फैल गई। दुर्दांत विकास के मौत की खबर उसके गांव बिकरू भी पहुंची लेकिन यहां गलियों में पसरे सन्नाटे और लोगों के चेहरों से खाैफ को नहीं हटा सकी।




 
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
बिकरू वो गांव जहां के लोग विकास दुबे के नाम से भी खौफ खाते हैं। बिकरू में पुलिस या कानून का नहीं विकास दुबे का राज चलता था। जो विकास कहता वहीं बिकरू का कानून होता। बिकरू में विकास दुबे के साथियों और पुलिस की मुठभेड़ के आठ दिन बीत चुके हैं। विकास दुबे को आज पुलिस ने मार गिराया है लेकिन बिकरू में खौफ का सन्नाटा अब भी पसरा है।

 
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
बिकरू के आधे से ज्यादा घरों में ताला लगा हुआ है। जिन घरों में लोग मौजूद है उनमें सिर्फ महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। विकास के एनकाउंटर को लेकर कोई भी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। पूरे गांव ने चुप्पी साध रखी है। बिकरू गांव के लोगों से सवाल कोई भी करो जवाब एक ही आता है कुछ सुनाई नहीं देता कुछ दिखाई नहीं देता।

 

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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
गांव के लोग मोबाइल और टीवी पर विकास के एनकाउंटर की खबरें देख रहे हैं। मुठभेड़ के बाद विकास दुबे के बिकरू गांव में पुलिस द्वारा जमीदोज किए गए उसके मकान में बारिश के बाद पानी भर गया है। गांव छावनी बना हुआ है। गांव में मौजूद पुलिस आसपास के घरों में मुस्तैद है। सड़कें और गलियां सूनी पड़ी है। मुख्य मार्गो पर पुलिस तैनात है। पुलिस की दर्जनों की संख्या में गाड़ियों के आने जाने का सायरन गांव में पसरा सन्नाटा तोड़ रहा है।

 
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
तीन जुलाई की सुबह से ही बिकरू में पीएसी की एक गाड़ी तैनात है। गांव में आने जाने वालों पर पुलिस नजर बनाए हुए है। कानपुर एनकाउंटर के बाद जब पुलिस ने गांव के लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी तो लोग बोल रहे थे साहब हमे कुछ नहीं पता। हमे माफ कर दो। हम उसके बारे में कुछ नहीं बता पाएंगे। क्योंकि जो पुलिस को मार सकता है वो कुछ भी कर सकता है।
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