कानपुर के बिकरू कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की टीम ने शुक्रवार को बिकरू गांव पहुंचकर अपनी जांच शुरू की। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बीएस चौहान की अगुवाई में बनी इस टीम में एसके अग्रवाल (हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज) और एके गुप्ता (पूर्व डीजीपी) शामिल हैं। शुक्रवार सुबह यह टीम शहर पहुंची। सर्किट हाउस में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर बिकरू कांड से जुड़ीं जानकारियां हासिल की।
विज्ञापन
2 of 7
मौके पर पहुंची तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की टीम
- फोटो : अमर उजाला
साथ ही वारदात के दिन से अब तक की कार्रवाइयों के दस्तावेज लिए। कांशीराम निवादा गांव पहुंची न्यायिक आयोग की टीम ने आईजी मोहित अग्रवाल और पूर्व एसएसपी दिनेश कुमार से पूछा कि आपको कैसे पता चला कि बिकरू कांड में शामिल दो बदमाश प्रेम प्रकाश और अतुल यहां छिपे हुए थे। उनकी घेराबंदी कैसे की गई? फायरिंग सबसे पहले किधर से हुई? मुठभेड़ में मारे गए बदमाश किस हथियार से फायर कर रहे थे?
विज्ञापन
3 of 7
मौके पर पहुंची तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की टीम
- फोटो : अमर उजाला
आईजी ने बताया कि पुलिस को कुछ संदिग्ध नंबर मिले थे जिन्हें सर्विलांस पर लिया गया था। सर्विलांस और मुखबिरों के जरिए लोकेशन पुख्ता हुई थी। पुलिस जब वहां पहुंची तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों मारे गए थे। फिर आयोग सदस्यों ने पूछा कि कैसे किया था एनकाउंटर। जिसपर उन्होंने बताया कि बदमाशों को चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया था। इसके लिए चार टीमों को लगाया गया था।
4 of 7
प्रभात की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
निवादा गांव के बाद आयोग की टीम पनकी कूड़ा प्लांट पहुंची जहां प्रभात मिश्रा का एनकाउंटर हुआ था। करीब 20 मिनट तक वारदात स्थल का मुआयना करने के बाद आयोग ने प्रभात के एनकाउंटर में शामिल पुलिस कर्मियों से पूछा कि एनकाउंटर में कितने सिपाही घायल हुए थे। इसपर पुलिस ने दो सिपाही घायल होने की जानकारी दी।
विज्ञापन
5 of 7
जहां प्रभात को मारी थी गोली वहां भी गई न्यायिक आयोग की टीम
- फोटो : amar ujala
इसके बाद आयोग ने पूछा कि पुलिस की गाड़ी पंचर हुई तो क्या गाड़ी में कोई पुलिस कर्मी मौजूद नहीं था। प्रभात पुलिस की पकड़ से कैसे भाग निकला। इस पुलिस ने जवाब दिया कि प्रभात को बीच में बैठाया गया था। गाड़ी पंचर होने के बाद पुलिस कर्मी बाहर निकलकर देखने लगे। तभी प्रभात पास बैठे पुलिस कर्मी की पिस्टल छीनकर उसे धक्का देते हुए भाग निकला।
विज्ञापन
6 of 7
आईजी मोहित अग्रवाल से पूछताछ करती न्यायिक आयोग की टीम
- फोटो : amar ujala
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट आरोपियों व पुलिसकर्मियों दोनों के लिए अहम
कानून के जानकारों के मुताबिक, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट जहां विकास के गैंग से जुड़े आरोपियों को कठोर सजा दिलाने में कारगर होगी, वहीं विकास दुबे और अन्य आरोपियों से मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के भाग्य का भी फैसला करेगी।
न्यायिक आयोग की टीम ने किया विकास दुबे के एनकाउंटर वाली जगह का निरीक्षण
- फोटो : amar ujala
विकास दुबे कांड के संबंध में एसआईटी जांच के अलावा, प्रवर्तन निदेशालय, आर्थिक अपराध शाखा, आयकर विभाग समेत कई जांचें चल रही हैं, लेकिन मामले में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण साबित होगी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति बीएस चौहान, हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति शशिकांत अग्रवाल और पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता को 30 सितंबर तक मामले में जांच रिपोर्ट सौंपनी है। न्यायिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोण से एक-एक बिंदु की बारीकी से जांच के बाद रिपोर्ट तैयार होगी।