अवैध तरीके से करोड़ों की संपत्ति जुटाने वाला दहशतगर्द विकास दुबे घर में एक रुपया नहीं रखता था। वारदात के बाद ढहाए गए विकास के घर से पुलिस को फूटी कौड़ी तक नहीं बरामद हुई थी। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि पुलिस की तलाशी फर्द में लिखी है। हालांकि यह बात अलग है कि 29 जून को अमर दुबे की अपने घर से शादी के दौरान विकास ने लाखों रुपये पानी की तरह बहाए थे।
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- फोटो : अमर उजाला
चौबेपुर के बिकरू गांव में दो जुलाई की देर रात विकास दुबे और उसके गुर्गों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर आठ पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। दूसरे दिन पुलिस ने विकास के घर के तीन कमरों, बाथरूम और हॉल को छोड़कर बाकी निर्माण को जेसीबी से ढहा दिया था।
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तलाशी फर्द के मुताबिक पुलिस टीम ने जब दोनों कमरों की तलाशी ली तो वहां रखीं अलमारियों और उसके लॉकर के ताले और बेड टूटा मिला था। पुलिस को गोपाल सैनी समेत विकास के छह करीबियों के घरों की अलमारियों के भी ताले टूटे मिले थे।
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जेवर और नकदी समेत अन्य सामान गायब था। ऐसे में ग्रामीणों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए। इस पर ग्रामीणों ने बताया कि वारदात के बाद आरोपियों के घरों पर पुलिस के अलावा कोई और नहीं गया था।
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लॉकडाउन में घर पर बनवाता था खाना
ग्रामीण बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान विकास गांव के गरीबों को अनाज व भोजन बंटवाता था। वह खुद अपने घर पर ही खाना बनवाता था। चौबेपुर पुलिस ने भी यहां आकर तैयार लंच पैकेट इलाके में बंटवाए थे। इस दौरान अगर कोई गरीब विकास से मदद मांगने आता था तो वह उन्हें नकद पैसे भी देता था।
सूत्रों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद विकास दुबे रायफल लेकर भागा था। इससे सवाल उठना लाजमी है कि विकास अगर घर से ये सारी गतिविधियां कर रहा था तो नकदी वे जेवर तलाशी में क्यों नहीं बरामद हुए।