कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने विकास दुबे की अपने गांव बिकरू और आस-पास में अच्छी पैठ है। आसपास के दर्जनों गांवों तक उसकी हनक है। यहां होने वालीं हर छोटी-बड़ी घटनाएं, कहासुनी विकास तक पहुंचती हैं। मामला थाना पुलिस से न निपटे तो विकास की अदालत में ही उसका हल निकलता है।
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विकास दुबे (काले कोट में)
- फोटो : amar ujala
बिकरू के लोगों में उसके नाम की दहशत इतनी है कि कोई उसका फैसला पलटने की हिम्मत नहीं करता। पड़ोसी गांव के लोग बताते हैं कि जब कोई मसला नहीं सुझलता तो वह विकास की चौखट पर जाता। इलाके में उसकी पहचान पंडित जी के तौर पर है।
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
बड़ी से बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के बाद फरारी में भी उसने अपने गांव से दूरी नहीं बनाई। वह यहां अकेले रह रहे पिता रामकुमार दुबे का हालचाल लेने अक्सर आता। क्षेत्र में उसका मुखबिर तंत्र इतना मजबूत है कि हर जानकारी उस तक पहुंच जाती है। खूंखार होने के बावजूद अपने गांव वालों के प्रति उसका व्यवहार नरम रहता है।
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विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
बताते हैं कि वह जेल से छूटकर आए या फरारी काटकर, गांव के बच्चों के लिए कुछ न कुछ जरूर लाता है। अपने इसी मोहजाल से उसने लोगों को अपना मुरीद बनाया। यही वजह है कि 60 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज होने के बावजूद गांव में उसकी अहमियत किसी सफेदपोश नेता जैसी है।
पिता की देखभाल को रखे हैं दो सेवक
वर्ष 2001 में भाजपा के दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री संतोष शुक्ला की थाने में घुसकर हत्या करने के आरोपी रहे और अब दोषमुक्त विकास का परिवार गांव में नहीं रह रहा है। सिर्फ पिता रामकुमार दुबे ही गांव में रहते हैं। मां सरला देवी छोटे बेटे दीपू दुबे के साथ कानपुर में रहती हैं। दीपू दुबे प्रॉपर्टी का बिजनेस करता है। गांव में पिता की देखभाल के लिए विकास ने रेखा और उसके पति कल्लू को बतौर सेवक रखा है। ये दोनों बिकरू के इसी विशालकाय घर में रहते हैं। बताते हैं कि गुरुवार रात जब गोलियां चलीं तब भी ये दोनों रामकुमार के साथ मौजूद थे।