पूरे प्रदेश को हिलाकर रख देने वाली बिकरू गांव में हुई आठ पुलिसकर्मियों को गोलियों से भून देने की घटना में चौबेपुर थानेदार विनय तिवारी की भूमिका संदिग्ध लग रही है। पहले थानेदार ने विकास दुबे पर रिपोर्ट दर्ज न कर पीड़ित राहुल को भगा दिया था।
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विकास के घर से बरामद हुए कारतूस
- फोटो : amar ujala
इसके बाद सीओ ने रिपोर्ट दर्ज कराई और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। दबिश में चौबेपुर थानेदार गए तो लेकिन पीछे-पीछे रहे और हमले से ठीक पहले वहां से भाग निकले। इससे वे शक के घेरे में आ गए हैं। मोहिनी नेवादा निवासी राहुल तिवारी ने दो दिन पहले चौबेपुर थाने में विकास दुबे के खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप लगाकर तहरीर दी थी।
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आठ पुलिसकर्मी हुए शहीद, सात घायल
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आरोप है कि एसओ विनय तिवारी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। जानकारी होने पर सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा ने रिपोर्ट दर्ज कराई। इसी केस में विकास दुबे को उठाने के लिए आला अधिकारियों की अनुमति पर पुलिस ने दबिश दी।
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हर जगह बिखरा था खून
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जुआ खिलवाने का लगाया था आरोप
कुछ महीने पहले सीओ ने चौबेपुर क्षेत्र में बड़ा जुआ पकड़ा था। मामले में सीओ ने जांच की थी तो पता चला था कि जुआ खिलाने के बदले रकम थानेदार तक पहुंचती है। जिसके बाद उन्होंने उसके खिलाफ रिपोर्ट लगाई थी। ऐसे कई मामले हैं, जिनकी वजह से सीओ और एसओ के बीच विवाद रहता था। दोनों एक दूसरे से असहमत रहते थे।
खेतों में मिले थे पुलिस कर्मियों के पार्थिव शरीर
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मामले में जांच के आदेश हुए हैं। कहां पर किसकी चूक रही है या इसमें कोई साजिश है, इसका पता जांच में चल जाएगा। उसी आधार पर कार्रवाई होगी। विकास पर पचास हजार का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस की कई टीमें उसे ढूंढ रही हैं। मोहित अग्रवाल, आईजी रेंज कानपुर